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कांगो में इबोला से अब तक 2,325 की मौत, पश्चिम अफ्रीका में घातक इतिहास को पछाड़ेगा
कांगो में इबोला से अब तक 2,325 की मौत

कांगो में इबोला से अब तक 2,325 की मौत, पश्चिम अफ्रीका में घातक इतिहास को पछाड़ेगा

लेखन गजेंद्र
Aug 18, 2026
04:17 pm

क्या है खबर?

मध्य अफ्रीकी देश लोकतात्रिक गणराज्य कांगो में इबोला वायरस का प्रकोप बढ़ता जा रहा है, जो पश्चिम अफ्रीका के घातक इतिहास को पछाड़ने की तरफ बढ़ रहा है। द गार्डियन के मुताबिक, कांगो में अब तक 2,325 लोगों की मौत संक्रमण से हो चुकी है, जो 2018 से 2020 के बीच हुई मौतों से काफी अधिक है। दक्षिण कैरोलिना गणराज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान ने कहा कि पुष्ट मामले 4,945 है। पिछले 24 घंटों में 101 मामले मिले हैं।

बीमारी

हर 30 मिनट में एक व्यक्ति की जान पर आफत

संयुक्त राष्ट्र ने का कहना है कि इबोला 'लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो में जीत रहा है' और महामारी हर 30 मिनट में एक व्यक्ति की जान ले रही है।

दक्षिण अफ्रीकी गणराज्य के 26 प्रांतों में से 6 प्रांत प्रभावित हुए हैं, जिनमें से मुख्य रूप से देश की उत्तर-पूर्वी सीमा से लगे प्रांत हैं।

अभी तक यहां 3,400 से अधिक मामले इटुरी प्रांत में दर्ज किए गए हैं, जहां इस बीमारी के फैलने की पहली रिपोर्ट आई थी।

संक्रमण

इटुरी में 90 प्रतिशत मामले

कांगो में इबोला सबसे पहले इंटुरी प्रांत के मोगवालु क्षेत्र में मिला। इसके बाद यह 6 प्रांतों में पहुंचा।

अभी सबसे अधिक इटुरी प्रभावित है। यहां 90 प्रतिशत मामले हैं। इसके बाद उत्तरी कीवु, दक्षिणी कीवु, हाउस उले, शोपो और बास उले है। बास उले में इबोला अगस्त में पहुंचा।

कांगो के पड़ोसी युगांडा में 20 मामले आए थे, जिनमें 2 मौतें हुईं। हालांकि, युगांडा ने 42 दिन नया मामला न मिलने पर जुलाई में इबोला मुक्त का ऐलान किया।

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बीमारी

क्यों नहीं थम रहा प्रकोप?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, हाल के सप्ताह में 579 नए मामले और 304 मौतें दर्ज हुईं, जो अब तक की सबसे दुर्दिन स्थिति है।

इसे मई 2026 में आधिकारिक रूप से प्रकोप घोषित किया गया, लेकिन इसने फरवरी के आसपास फैलना शुरू किया था।

कांगो में लचर स्वास्थ्य व्यवस्था, देरी से संक्रमण की पहचान, संपर्क में आए लोगों की पहचान सबसे बड़ी बाधा बनी है।

इसके अलावा सशस्त्र संघर्ष के कारण स्वास्थ्यकर्मियों की पहुंच भी सीमित है।

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प्रसार

इबोला का अब तक का सबसे घातक असर

इस बार यह बुंडिबुग्यो इबोला वायरस है, जो दुर्लभ प्रकार है। इस स्ट्रेन के खिलाफ अभी कोई स्वीकृत वैक्सीन या उपचार उपलब्ध नहीं है। नई वैक्सीन का ट्रायल चल रहा है।

WHO के मुताबिक, यह प्रकोप इतिहास का सबसे बड़ा प्रकोप बनने की राह पर है, जो पश्चिम अफ्रीका में 2014-16 के इबोला प्रकोप को भी पीछे छोड़ देगा।

आंकड़ों के अनुसार , 2014-16 के प्रकोप में गिनी, लाइबेरिया और सिएरा लियोन में 28,616 मामले और 11,325 मौतें हुई थीं।

इबोला

क्या है इबोला वायरस?

इबोला वायरस पहली बार 1976 में अफ्रीका में सामने आया था। उस समय सूडान और तत्कालीन जायरे (अब कांगो) में इसके मामले मिले थे।

यह संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी और शरीर के दूसरे तरल पदार्थ के संपर्क से फैलता है।

कांगो में कई बार इसके मामले सामने आ चुके हैं। अब ये इसका 17वां प्रकोप है।

2014 से 2016 के बीच पश्चिम अफ्रीका में इबोला से 11,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।

इबोला

क्या इबोला कोरोना जैसे फैलता है?

कोरोना वायरस हवा के जरिए फैलता है, जबकि इबोला ऐसा नहीं है।

यह संक्रमित व्यक्ति के रक्त, उल्टी, लार, पसीना, वीर्य, अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के साथ दूषित सतहों, चिकित्सा उपकरणों या असुरक्षित दफन प्रथाओं के दौरान भी फैलता है।

संक्रमित व्यक्ति के साथ एक कमरे में रहने से इबोला की संभावना तबतक कम है, जबतक उसके तरल पदार्थ के संपर्क में व्यक्ति न आए।

इसलिए कोरोना जैसी सांस संबंधी वायरस की तुलना में इबोला का आकस्मिक प्रसार कठिन है।

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