LOADING...
ईरान के युद्ध समाप्ति प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हैं ट्रंप, परमाणु मुद्दों की शर्तों से नाखुश
ईरान के युद्ध समाप्ति प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हैं ट्रंप (फाइल तस्वीर)

ईरान के युद्ध समाप्ति प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हैं ट्रंप, परमाणु मुद्दों की शर्तों से नाखुश

लेखन गजेंद्र
Apr 28, 2026
10:25 am

क्या है खबर?

ईरान ने युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका को अपना नया प्रस्ताव भेजा है, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इससे संतुष्ट नहीं दिख रहे। ट्रंप ने सोमवार को व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में अपने सुरक्षा सलाहकारों के साथ बैठक कर ईरान के प्रस्ताव पर चर्चा की। ट्रंप होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और परमाणु संवर्धन से जुड़े मुद्दे पर बाद में बात करने की शर्त पर सहमत नहीं हैं। वे चाहते हैं कि परमाणु मुद्दा शुरू में निपटाया जाए।

प्रस्ताव

ईरान के नए प्रस्ताव में क्या है?

अमेरिका को भेजे गए ईरान के नए प्रस्ताव में युद्धविराम को लंबी अवधि के लिए बढ़ाने या दोनों पक्ष के युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने पर सहमत होने की मांग है। ईरानी प्रस्ताव के अनुसार, परमाणु वार्ता तभी शुरू होगी जब होर्मुज जलडमरूमध्य खुल जाएगा और नाकाबंदी हटा ली जाएगी। ईरान का कहना है कि जब होर्मुज जलडमरूमध्य और युद्ध समाप्ति पर सहमति बन जाएगी, तब वह परमाणु मुद्दे पर वार्ता करने को तैयार होगा, इससे पहले नहीं।

प्रस्ताव

अमेरिका चाहता है कि परमाणु मुद्दे पर पहले बात हो

रॉयटर्स के मुताबिक, ट्रंप परमाणु मुद्दे को पहले निपटाना चाहते हैं, इसलिए वे प्रस्ताव से नाखुश हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम से संबंधित किसी मुद्दे को हल किए बिना किसी भी समझौते की संभावना को खारिज कर दिया है। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा, "हम उन्हें इस तरह की मनमानी करने की छूट नहीं दे सकते।" व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ओलिविया वेल्स ने कहा कि अमेरिका प्रेस के माध्यम से बातचीत नहीं करेगा।

Advertisement

वार्ता

ईरानी विदेश मंत्री ने अमेरिका पर लगाया आरोप

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार को मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने शांति वार्ता की विफलता के लिए अमेरिका को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी दृष्टिकोण के कारण, प्रगति होने के बावजूद, वार्ता का पिछला दौर अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में विफल रहा, क्योंकि उसकी मांगें अत्यधिक थीं। इस दौरान रूस ने ईरान हित और इस पूरे इलाके के दूसरे देशों के हित में समर्थन का वादा किया है।

Advertisement