डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा धोखाधड़ी की जांच शुरू की, क्या भारतीयों पर पड़ेगा असर?
क्या है खबर?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड के लिए लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) वीजा से जुड़े मामले में एक बड़ी जांच शुरू कर दी है। अमेरिकी श्रम विभाग के महानिरीक्षक एंथोनी डी'एस्पोसिटो ने बुधवार को बताया कि आव्रजन संबंधी धोखाधड़ी पर यह ट्रंप प्रशासन की पहली व्यापक जांच है। विभाग की ओर से H-1B और PERM वीजा के दुरुपयोग, श्रम तस्करी और अमेरिकी श्रमिकों के विस्थापन की पड़ताल की जाएगी।
जांच
सिर्फ मजदूर नहीं बल्कि पेशेवर भी निशाने पर
एंथोनी ने फॉक्स न्यूज से कहा कि यह वीजा धोखाधड़ी हिंसक अपराध को बढ़ावा दे रहे हैं, विदेशी श्रमिकों से जुड़े वीजा और मानव तस्करी के अधिकांश मामले कार्टेल और अंतरराष्ट्रीय गिरोहों से जुड़े हैं। उन्होंने कहा, "ये सिर्फ मजदूर नहीं हैं। ये वे लोग हैं जो चिकित्सा सुविधाओं और डॉक्टरों के कार्यालयों में काम करते हैं और लोगों को खतरे में डाल रहे हैं।" अभी तक धोखाधड़ी की जांच में कई दर्जन समन जारी होना शुरू हो चुके हैं।
झटका
कोर्ट से झटका लगने के बाद ट्रंप का अगला कदम
ट्रंप प्रशासन ने उच्च कुशल विदेशी श्रमिकों के लिए H-1B वीजा चाहने वाले कंपनी नियोक्ताओं के लिए निर्धारित 1 लाख डॉलर (करीब 95 लाख रुपये) का शुल्क अनिवार्य किया था, जिससे कंपनियों का विदेशी कर्मचारियों के प्रति मोह भंग हुआ। हालांकि, पिछले महीने एक संघीय न्यायाधीश ने ट्रंप के इस फैसले को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि प्रशासन ने अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है। इस फैसले से ट्रंप को झटका लगा, जिसके बाद यह कदम उठाया।
असर
क्या इस जांच का भारतीयों पर पड़ेगा असर?
अमेरिका में H-1B वीजा में भारतीयों की हिस्सेदारी 70-73 प्रतिशत है। इसमें ज्यादातर IT और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में काम करने वाले कर्मचारी हैं। इस जांच का सीधे तौर पर सभी भारतीयों पर असर नहीं पड़ेगा। यह मुख्य रूप से धोखाधड़ी, फर्जी कंपनियां , फर्जी नौकरी, कम वेतन और तस्करी पर ध्यान केंद्रित करेगा। हालांकि, यह वीजा पाने वाले अधिकतर भारतीय हैं, ऐसे में उनको वीजा जारी करने वाली प्रक्रिया के तहत कई भारतीय जांच के घेरे में आ सकते हैं।
वीजा
क्या है H-1B वीजा और PERM?
H-1B वीजा एक गैर-अप्रवासी कार्य वीजा है जिसका उपयोग अमेरिकी कंपनियां विदेशी कुशल श्रमिकों को अपने यहां नियुक्ति देने के लिए करती हैं। यह वीजा परामर्श, इंजीनियरिंग और विनिर्माण, स्वास्थ्य और चिकित्सा अनुसंधान और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में मिलता है। PERM यानी प्रोग्राम इलेक्ट्रॉनिक समीक्षा प्रबंधन अमेरिका की रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का पहला-महत्वपूर्ण चरण है। इसे श्रम विभाग संचालित करता है। इसमें कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों के लिए PERM प्रक्रिया करनी होती है। इसमें बहुत कठिन नियम हैं।