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क्या पाकिस्तान ने 'ऑपरेशन सिंदूर' को रोकने के लिए अमेरिका पर डाला था राजनयिक दबाव?
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने अमेरिका पर डाला था राजनयिक दबाव

क्या पाकिस्तान ने 'ऑपरेशन सिंदूर' को रोकने के लिए अमेरिका पर डाला था राजनयिक दबाव?

Jan 06, 2026
01:26 pm

क्या है खबर?

भारत की ओर से अप्रैल 2025 में हुई पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' ने पाकिस्तान को अमेरिका के आगे गिड़गिड़ाने और राजनयिक दबाव बनाने के लिए मजबूर कर दिया था। अमेरिकी सरकारी दस्तावेजों से पाकिस्तान द्वारा की गई असाधारण लॉबिंग का बड़ा खुलासा हुआ है। इसमे तहत पाकिस्तान ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत की सैन्य प्रतिक्रिया को कमजोर करने के लिए अमेरिका पर राजनयिक दबाव बनाया था।

कदम

पाकिस्तान ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के शुरू होते ही उठाए थे कदम

NDTV द्वारा समीक्षा किए गए दस्तावेजों और अमेरिकी विदेशी एजेंट पंजीकरण अधिनियम (FARA) के तहत दर्ज किए गए रिकॉर्ड से पता चलता है कि पाकिस्तानी राजनयिकों और रक्षा अधिकारियों ने ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत और संघर्ष विराम के पूर्ण कार्यान्वयन के बीच अमेरिकी प्रशासन पर पूर्ण राजनयिक दबाव डाला था। इसके तहत उसने अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों, सांसदों और प्रभावशाली मीडिया आउटलेट्स के साथ इस मामले पर 50 से अधिक बैठकें की थीं।

उद्देश्य

अमेरिका पर हस्तक्षेप के लिए दबाव डालना था पाकिस्तान का उद्देश्य

FARA पर दर्ज रिकॉर्ड के अनुसार, अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत और उनके रक्षा अटैची ने ईमेल, फोन कॉल और व्यक्तिगत बैठकों के माध्यम से 60 से अधिक अधिकारियों और मध्यस्थों से बार-बार संपर्क किया था। इसका घोषित उद्देश्य अमेरिका पर हस्तक्षेप के लिए दबाव डालना और जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के सैन्य अभियान को किसी भी तरह रोकना था, जिसमें उसके लगातार बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा था।

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विषय

बैठकों में क्या थे चर्चा के विषय?

इस अभियान में कांग्रेस, पेंटागन, विदेश विभाग और प्रमुख अमेरिकी पत्रकार शामिल थे। पाकिस्तानी प्रतिनिधियों ने कश्मीर, क्षेत्रीय सुरक्षा, दुर्लभ खनिज और व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की। इसके साथ ही प्रमुख अमेरिकी मीडिया संगठनों से साक्षात्कार और पृष्ठभूमि संबंधी जानकारी प्राप्त करने का भी प्रयास किया। कई प्रविष्टियों में इन प्रयासों को पाकिस्तान का निरंतर प्रतिनिधित्व बताया गया है, जो अभियान की तीव्रता और निरंतरता को रेखांकित करता है।

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प्रयास

पाकिस्तान के अमेरिका का समर्थन हासिल करने के लिए उठाए थे ये कदम

नवंबर 2025 में न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने ट्रंप प्रशासन तक त्वरित पहुंच, अनुकूल व्यापार और राजनयिक परिणाम हासिल करने के लिए अमेरिका की 6 पैरवी फर्मों के साथ लगभग 50 लाख डॉलर (लगभग 45.13 करोड़ रुपये) वार्षिक मूल्य के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। उसके बाद ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की मेजबानी की थी। उसे पाकिस्तान की अमेरिका से नजदीकी के रूप में देखा गया।

खर्च

पाकिस्तान ने अमेरिकी समर्थन हासिल करने के लिए बढ़ाया खर्च

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने अप्रैल और मई में अमेरिकी समर्थन हासिल करने के लिए अपना खर्च नाटकीय रूप से बढ़ा दिया, जो इसी अवधि में भारत की तुलना में कम से कम तीन गुना अधिक था। ये नीतिगत बदलाव अमेरिका-पाकिस्तान के पहले के तनावपूर्ण संबंधों से अलग थे। इनमें राष्ट्रपति ट्रंप की सार्वजनिक प्रशंसा, नोबेल शांति पुरस्कार के लिए उनके नाम के नामांकन, आकर्षक व्यापार और रियायतों की तलाश शामिल थी।

पैरवी

पाकिस्तान ने अमेरिकी मीडिया जगत में बढ़ाया अपनी पैरवी का दावा

राजनयिक सूत्रों ने बताया कि 2025 के FARA दस्तावेज एक व्यापक पैटर्न की पुष्टि करते हैं। उसके अनुसार, पाकिस्तान ने कैपिटल हिल और अमेरिकी मीडिया जगत में अपनी पैरवी का दायरा बढ़ाया, जिसमें कुछ व्यक्तिगत अनुबंध और संपर्क प्रयासों पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए। हालांकि, इस बात के संकेत हैं कि वर्ष के अंत में खर्च में कमी आई, लेकिन ये दस्तावेज ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के तीव्र सैन्य और राजनयिक दबाव में होने की पुष्टि करते हैं।

ऑपरेशन

भारत के ऑपरेशन में हुई थी 100 से अधिक आतंकियों की मौत

भारत की ओर से चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' में पाकिस्तान और PoK में स्थिति 9 आतंकी ठिकानों पर मिसाइलें दागी गई थीं। इन हमलों में आतंकी ठिकानों के ध्वस्त होने के साथ ही 100 से अधिक आतंकवादी भी मारे गए थे। उसके बाद पाकिस्तान ने भी भारत पर जवाबी हमले किए, लेकिन भारतीय सेना ने हर हमले को नाकाम कर दिया। हालांकि, 11 मई को दोनों देशों की आपसी सहमति से संघर्ष विराम हो गया था।

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