चीन ने माउंट एवरेस्ट के पास तिब्बत में बनाया ड्रोन रिसर्च सेंटर, क्यों चुना यह जगह?
क्या है खबर?
चीन ड्रोन रिसर्च और डेवलपमेंट के क्षेत्र में काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है। PTI की रिपोर्ट के अनुसार, इसी दिशा में उसने तिब्बत में माउंट एवरेस्ट के पास नया ड्रोन रिसर्च और डेवलपमेंट सेंटर शुरू किया है। इस सेंटर का मकसद ऊंचाई वाले इलाकों में उड़ने वाले ड्रोन की क्षमता बढ़ाना है। यहां नई तकनीक पर रिसर्च होगी और अलग-अलग परिस्थितियों में ड्रोन का परीक्षण किया जाएगा, ताकि उन्हें भविष्य की जरूरतों के अनुसार बेहतर बनाया जा सके।
वजह
तिब्बत को ही क्यों चुना गया?
चीन ने इस सेंटर के लिए तिब्बत को इसलिए चुना है, क्योंकि यहां की औसत ऊंचाई 4,000 मीटर से ज्यादा है।
इस इलाके में हवा पतली है, ऑक्सीजन कम मिलती है, मौसम तेजी से बदलता है और पहाड़ी रास्ते काफी कठिन हैं।
ऐसी परिस्थितियां ऊंचाई वाले इलाकों में काम करने वाले ड्रोन की जांच और परीक्षण के लिए सबसे सही मानी जाती हैं और नई तकनीकों को परखने के लिए बेहद अनुकूल वातावरण भी उपलब्ध कराती हैं।
उद्देश्य
क्या है इस सेंटर का उद्देश्य?
इस ड्रोन रिसर्च सेंटर का मुख्य उद्देश्य ऐसे ड्रोन तैयार करना है, जो ऊंचाई वाले इलाकों में बेहतर तरीके से काम कर सकें।
इनका इस्तेमाल सीमा निगरानी, सुरक्षा, गश्त, आपदा राहत, भू-वैज्ञानिक सर्वे और दूर-दराज के क्षेत्रों में जरूरी सामान पहुंचाने जैसे कामों में किया जाएगा।
इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई तकनीकों पर भी शोध को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे भविष्य में और अधिक सक्षम तथा भरोसेमंद ड्रोन तैयार किए जा सकेंगे।
अन्य
तकनीकी दौड़ में बढ़त बनाने की कोशिश
यह सेंटर ऐसे समय शुरू हुआ है जब चीन और अमेरिका के बीच नई तकनीकों को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।
इससे चीन की ड्रोन तकनीक को और मजबूती मिलेगी।
वहीं नेपाल में चीन की कंपनी DJI के भारी सामान ढोने वाले ड्रोन पहले से माउंट एवरेस्ट के ऊपरी कैंपों तक जरूरी सामान पहुंचाने और वहां से कचरा नीचे लाने जैसे कामों में इस्तेमाल किए जा रहे हैं, जिससे काम पहले की तुलना में आसान बना है।