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बांग्लादेश सेना प्रमुख ने मोहम्मद यूनुस को अंतरिम नेता बनाए जाने का किया था विरोध
बांग्लादेश सेना प्रमुख ने मोहम्मद यूनुस को अंतरिम नेता बनाए जाने का किया था विरोध (फाइल तस्वीर)

बांग्लादेश सेना प्रमुख ने मोहम्मद यूनुस को अंतरिम नेता बनाए जाने का किया था विरोध

लेखन गजेंद्र
Aug 06, 2026
06:23 pm

क्या है खबर?

बांग्लादेश में 5 अगस्त, 2024 को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिराने के बाद मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का प्रमुख बनाने की तैयारी चल रही थी, लेकिन बांग्लादेश सेना के प्रमुख इसके पक्ष में नहीं थे। बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के पूर्व कानून सलाहकार आसिफ नजरुल ने प्रोथोम आलो से बातचीत में इसका खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि सेना प्रमुख जनरल वकार-उज़-जमान ने 2 प्रमुख चिंताओं का हवाला देते हुए प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस का विरोध किया था।

खुलासा

सेना प्रमुख ने पूछा था- कौन करेगा नेतृत्व?

ढाका विश्वविद्यालय के विधि विभाग के प्रोफेसर नजरुल ने 6 अगस्त को सेना मुख्यालय में सेना प्रमुख से हुई मुलाकात का जिक्र कर बताया कि वह उनके बुलावे पर वहां गए थे।

जनरल वकार ने साफतौर पर पूछा कि अंतरिम सरकार का नेतृत्व कौन करेगा और वह इस पर चर्चा करना चाहते हैं।

नजरुल ने उन्हें बताया कि छात्रों ने फैसला किया है कि प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस को प्रमुख बनाया जाना चाहिए, और वे सबसे उपयुक्त विकल्प हैं।

विरोध

सेना प्रमुख ने यूनुस के नाम पर उठाई 2 आपत्तियां

यूनुस का नाम लेते ही जनरल ने 2 आपत्तियां उठाई। उन्होंने कहा कि यूनुस पहले से श्रम कानून के मामले में दोषी हैं, दूसरा उनपर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है।

इस पर नजरुल ने उनको बताया कि अगर सत्ताधारी पार्टी नाराज है, तो वह आपको किसी भी मामले में दोषी ठहरा सकती है। उन्होंने इसे अवामी लीग सरकार का दुष्प्रचार बताया।

उन्होंने यूनुस को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अत्यंत सम्मानित व्यक्ति बताते हुए कहा कि कोई विकल्प नहीं है।

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नाम

यूनुस के अलावा 2 अन्य नामों की भी चली थी चर्चा

नजरुल ने बताया कि 6 अगस्त को सेना प्रमुख से मुलाकात से पहले 5 अगस्त की शाम को कर्जन हॉल में छात्रों के साथ एक अलग बैठक हुई थी।

इस दौरान उनकसे पूछा गया था कि अंतरिम सरकार का मुखिया कौन होगा?

तब नजरुल ने बांग्लादेश बैंक के पूर्व गवर्नर सालेहुद्दीन अहमद साहब और प्रख्यात अर्थशास्त्री वाहिदुद्दीन महमूद साहब का नाम लिया था। उसी दौरान छात्रों की और से यूनुस के नाम का प्रस्ताव आया था।

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आंदोलन

आंदोलन का किया था मार्गदर्शन

प्रोफेसर नजरुल ने 2024 में शेख हसीना के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहे छात्रों का मार्गदर्शन किया था।

वे हसीना विरोधी आंदोलन में सबसे प्रभावशाली नागरिक आवाजों में एक थे। विरोध-प्रदर्शनों का नेतृत्व करने वाले छात्र नेतृत्व में उनका प्रभाव था और उनकी राय ली जा रही थी।

सेना मुख्यालय और बंगभवन में बैठक और मोहम्मद यूनुस के शपथ ग्रहण तक उनकी भूमिका अग्रणी रही।

बाद में वे यूनुस की अंतरिम सरकार में कानून, न्याय और संसदीय मामलों के सलाहकार बने।

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