भारत समेत पूरे एशिया में विलंबित हुई 1,400 उड़ानें और 67 हुई रद्द, जानिए कारण
क्या है खबर?
एशिया भर में हवाई यात्रा में व्यवधान के कारण अफरा-तफरी मच गई है। भारत, थाईलैंड, जापान और अन्य एशियाई देशों के प्रमुख हवाई अड्डों पर सोमवार (13 अप्रैल) को 60 से अधिक उड़ानें रद्द हुई और 1,400 से अधिक विलंबित रही। ऐसे में हजारों की संख्या में यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इंडिगो, बैटिक एयर और सिंगापुर एयरलाइंस समेत दर्जनों एयरलाइंस इन व्यवधानों से प्रभावित हुईं। ऐसे में आइए इस व्यवधान का कारण जानते हैं।
आंकड़े
13 प्रमुख हवाई अड्डों रद्द हुईं 67 उड़ानें
ट्रैवल एंड टूर वर्ल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, थाईलैंड, भारत, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), जापान और सिंगापुर समेत एशिया के 13 प्रमुख हवाई अड्डों पर कुल 67 उड़ानें रद्द कर दी गईं और 1,470 विलंबित हुईं। रिपोर्ट के अनुसार, 12 अप्रैल के विमानन आंकड़ों के मुताबिक, एशिया और खाड़ी देशों में कुल 445 उड़ानें रद्द हुईं और 3,800 से अधिक उड़ानों में देरी हुई। इससे हजारों यात्री हवाई अड्डों पर फंसे रहे और उन्हें खासी परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रभावित
बैटिक एयर हुई सबसे अधिक प्रभावित
सबसे ज्यादा प्रभावित एयरलाइंस बैटिक एयर थी, जिसकी 10 उड़ानें रद्द हुईं और 75 में देरी हुई। इसके अलावा, एमिरेट्स, सिंगापुर एयरलाइंस, थाई एयरवेज और लायन एयर भी प्रभावित हुईं। ऑल निप्पॉन एयरवेज (ANA) ने टोक्यो में 75 उड़ानें स्थगित कीं। इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता और थाईलैंड का बैंकॉक सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। जकार्ता का सोकार्नो-हट्टा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ, जहां 216 उड़ानें विलंबित हुईं और 13 रद्द हुईं।
हालात
बैंकाक में क्या रही स्थिति?
रिपोर्ट के अनुसार, बैंकॉक के सुवर्णभूमि हवाई अड्डे पर 199 उड़ानें विलंबित हुईं, जबकि टोक्यो के हानेडा हवाई अड्डे पर 182 उड़ानें विलंबित हुईं। जापान के नरिता अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 90 उड़ानें विलंबित हुईं और 10 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। जापान के टोक्यो और दिल्ली में भी यात्रियों की भारी संख्या के कारण काफी व्यवधान देखने को मिला। इसी प्रकार दुबई, मुंबई, बेंगलुरु और सिंगापुर भी इससे प्रभावित हुए। इससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
हालात
भारत में कैसे रहे हालात?
भारत में इंडिगो, एयर इंडिया और स्पाइसजेट ने सबसे अधिक उड़ानें विलंबित होने की सूचना दी। एयर इंडिया ने 4 उड़ानें रद्द कीं, जबकि 74 अन्य उड़ानें विलंबित हुईं। मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 108 उड़ानें विलंबित हुईं और 5 रद्द हुईं। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 5 उड़ानें रद्द हुईं और 176 विलंबित हुईं। बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा हवाई अड्डे पर 4 उड़ानें रद्द हुईं और 76 का समय बदला गया।
परेशानी
यात्रियों को कैसे हुई परेशानी?
एशिया भर में हवाई उड़ानों में व्यवधान के कारण हजारों यात्री फंस गए। एशिया, खाड़ी क्षेत्र और यूरोप के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को लंबे ठहराव और रातोंरात देरी का सामना करना पड़ा। उन्हें अंतिम समय में मार्गों में बदलाव भी देखना पड़ा क्योंकि एयरलाइंस विमानों और कर्मचारियों को फिर से तैनात करने की कोशिश कर रही थीं। अमेरिका-ईरान युद्ध और ईंधन की लागत के दबाव के बीच हाल के महीनों में यह सबसे गंभीर व्यवधान रहा है।
कारण
हवाई यातायात में व्यवधान का क्या रहा कारण?
एशिया के हवाई अड्डों पर व्यापक व्यवधान का कारण हवाई यातायात में भारी वृद्धि और परिचालन संबंधी चुनौतियां हैं। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण हवाई क्षेत्रों पर प्रतिबंध लग गए हैं और ईंधन की लागत बढ़ गई है। भू-राजनीतिक तनाव के बीच, परिचालन लागत में वृद्धि के कारण एयरलाइंस के लिए सुचारू संचालन बनाए रखना मुश्किल हो गया है। ऐसे में घरेलू और क्षेत्रीय नेटवर्क का विस्तार करने वाली एयरलाइनों ने सबसे अधिक व्यवधान की सूचना दी है।
पृष्ठभूमि
युद्ध शुरू होने के बाद रद्द हो चुकी हैं 10,000 से अधिक उड़ानें
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से भारतीय एयरलाइंस पहले ही 10,000 से अधिक उड़ानें रद्द कर चुकी हैं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के संयुक्त सचिव असंगबा चुबा आओ ने पिछले सप्ताह बताया था कि भारतीय एयरलाइंस प्रतिदिन मध्य-पूर्व के लिए औसतन 300-350 उड़ानें संचालित करती थीं, लेकिन वर्तमान में इनकी संख्या घटकर 80-90 रह गई है। उन्होंने बताया कि यह युद्ध भारतीय विमानन उद्योग के लिए बड़ा झटका साबित हुआ है।