टी दिलीप ने की विराट कोहली की तारीफ, बताया कैसे बदला फील्डिंग का माहौल
क्या है खबर?
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व फील्डिंग कोच टी दिलीप ने पूर्व कप्तान विराट कोहली की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें टीम के फील्डिंग स्तर को वैश्विक ऊंचाइयों पर ले जाने का श्रेय दिया है। जियोस्टार को दिए एक हालिया साक्षात्कार में दिलीप ने कहा कि कोहली के मैदान पर रहने से पूरी टीम में एक ऐसा प्रभाव पैदा होता था, जिससे हर खिलाड़ी का प्रदर्शन अपने आप बेहतर हो जाता था। आइए जानते हैं उन्होंने क्या कुछ कहा।
समझौता
खेल की तीव्रता से कोई समझौता नहीं
दिलीप ने कोहली के खेल के प्रति समर्पण को रेखांकित करते हुए कहा, "विराट कोहली के साथ मैदान पर खेल की तीव्रता को लेकर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।"
उन्होंने पावरप्ले के दौरान कोहली के त्वरित प्रतिक्रिया और डाइव लगाने की क्षमता की सराहना की।
दिलीप ने स्पष्ट किया कि अपने करियर के इस पड़ाव पर भी कोहली अपनी आखिरी सीरीज तक उतने ही चुस्त और चौकन्ने नजर आए और उच्च मानकों को बरकरार रखा।
दृष्टिकोण
कोहली एक फील्डर से कहीं अधिक- दिलीप
दिलीप ने कोहली की फील्डिंग के अनूठे तरीके की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह सिर्फ इस बारे में नहीं है कि वह गेंद आने पर क्या करते हैं, बल्कि तब भी क्या करते हैं जब गेंद उनके पास नहीं आती है।
उन्होंने कोहली की खेल के प्रति जागरूकता और सक्रिय रूप से शामिल रहने की इच्छा को मैदान पर उनकी विशिष्टता के रूप में उजागर किया।
कोहली आज भी टीम में अपनी प्रतिबद्धता से एक मिसाल कायम करते हैं।
प्रभाव
कोहली का टीम पर पड़ता है सकारात्मक प्रभाव
दिलीप ने बताया कि कोहली का प्रभाव उनके व्यक्तिगत प्रदर्शन से कहीं अधिक है और इसका पूरी टीम पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने कहा, "जब वह आसपास होते हैं, तो उसकी ऊर्जा हमेशा संक्रामक होती है।"
दिलीप ने इस बात पर जोर दिया कि कोहली जिस तरह से अभ्यास सत्र और वास्तविक मैच के लिए तैयारी करते हैं, उसमें ज्यादा अंतर नहीं है, जो टीम पर उनके प्रभाव के पीछे सबसे बड़े कारणों में से एक है।
परिभाषा
कोहली ने बदली फिटनेस की परिभाषा
बतौर कप्तान अपने शुरुआती दिनों से ही कोहली ने न केवल खुद को बदला, बल्कि भारतीय टीम की फिटनेस संस्कृति को पूरी तरह से नए सिरे से परिभाषित किया।
उनके कठोर प्रशिक्षण मानकों ने उनके साथियों को अधिक दक्ष, तेज और अनुशासित होने के लिए प्रेरित किया।
आज 37 वर्ष की उम्र में भी उनकी शारीरिक क्षमता यह साबित करती है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बने रहने के लिए शारीरिक दक्षता कोई विकल्प नहीं है।