रविचंद्रन अश्विन ने संजय मांजरेकर द्वारा की गई आलोचना पर दिया अहम बयान, जानिए क्या कहा
क्या है खबर?
भारतीय क्रिकेट टीम के महानतम स्पिनरों में शुमार रविचंद्रन अश्विन ने अपने शुरुआती अंतरराष्ट्रीय करियर का एक बेहद दिलचस्प और अनसुना किस्सा साझा किया है। उन्होंने बताया कि कैसे पूर्व भारतीय बल्लेबाज संजय मांजरेकर की तीखी आलोचना ने उन्हें आहत किया और उन्होंने इसे कैसे लिया। यह वाकया साल 2011-12 का है, जब भारत के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर अश्विन का प्रदर्शन निराशजनक रहा । वह 3 टेस्ट मैचों में 62 के औसत से केवल 9 विकेट ले पाए थे।
बयान
मुझे बहुत गुस्सा आया और बुरा लगा था - अश्विन
अश्विन ने जियोहॉटस्टार के साथ साक्षात्कार में कहा, "मेरे पहले ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद मांजरेकर ने एक लेख लिखा था। जब मैं वापस लौट रहा था, तो मैंने उसे पढ़ा। उसे पढ़कर मुझे बहुत गुस्सा आया था। मुझे वास्तव में बहुत बुरा लगा था। गुस्सा तात्कालिक प्रतिक्रिया थी, लेकिन मुझे अंदर से बहुत बुरा लगा था। उसके बाद मैं फ्लाइट में सो गया और मैंने उस बात को जाने दिया। उस समय मैं मांजरेकर से ज्यादा बात नहीं करता था।"
प्रतिक्रिया
अश्विन ने मांजरेकर की आलोचना पर क्या दी प्रतिक्रिया?
अश्विन ने कहा, "मैने मांजरेकर की आलोचना को सकारात्मक रूप से लिया। मैंने अगले 4 सालों तक बहुत कड़ी मेहनत की।"
उन्होंने आगे कहा, "मैं कोई जन्मजात प्रतिभाशाली एथलीट नहीं था। मैंने बहुत पसीना बहाया और फिर साल 2015 में, उन्होंने (मांजरेकर) एक और लेख लिखा कि मैं अब कितनी अच्छी गेंदबाजी कर रहा हूं और वह चाहते थे कि मैं इसी तरह प्रदर्शन करना जारी रखूं। इसके बाद मैने पहली बार उनका नंबर मांगा था।"
भावना
उनका लेख मेरे लिए एक गुरु के समान था - अश्विन
अश्विन ने कहा, "मैने उन्हें (मांजरेकर) मैसेज किया कि उस समय मुझे बहुत बुरा लगा था, लेकिन आपका लेख मेरे पास एक गुरु की तरह आया और उसने मेरा जीवन बदल दिया। उन्होंने जो बातें लिखी थीं, उनमें दम था।"
अश्विन ने कहा, "अब कभी मेरी आलोचना होती है, तो मैं बस यही सोचता हूं कि क्या इसमें मेरे लिए कुछ सीखने लायक है। अगर मुझे लगता है कि कुछ सीखने को है, तो मैं उसे स्वीकार कर लेता हूं।"
करियर
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत के दूसरे सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज
मांजरेकर की उस आलोचना को गुरुमंत्र मानने वाले अश्विन ने इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
18 दिसंबर, 2024 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने वाले अश्विन भारत के इतिहास के सबसे सफल मैच-विजेताओं में गिने गए।
उन्होंने अपने करियर के 287 मैचों में कुल 765 विकेट चटकाए और 4,394 रन भी बनाए।
उन्होंने महान अनिल कुंबले के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत के दूसरे सबसे सफल गेंदबाज के रूप में संन्यास लिया।