इस टी-20 लीग से पाकिस्तानी खिलाड़ियों को बैन करने की मिली चेतावनी, जानिए वजह
क्या है खबर?
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) पर अपने खिलाड़ियों को विदेशी टी-20 लीग में खेलने की अनुमति देने के बदले अतिरिक्त राशि मांगने के आरोप लगे हैं। बोर्ड ने मेजर लीग क्रिकेट (MLC) की टीमों से प्रत्येक पाकिस्तानी खिलाड़ी के लिए करीब 24 लाख रुपये अतिरिक्त मांगे हैं, जबकि यह शुल्क पहले तय नहीं था। इस मांग से लीग की टीमों में नाराजगी बढ़ गई है। कुछ टीमें पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर अनौपचारिक प्रतिबंध लगाने पर विचार भी कर रही हैं।
नियम
MLC ने की है PCB की आलोचना
रिपोर्ट के अनुसार, खिलाड़ियों को अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करने के बदले PCB द्वारा भारी शुल्क मांगने की MLC फ्रेंचाइजियों ने आलोचना की है।
NOC इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) के नियमों के तहत जरूरी दस्तावेज है, जो खिलाड़ियों को फ्रेंचाइजी लीग में हिस्सा लेने की अनुमति देता है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि PCB ऐसी मांग तभी करता है, जब खिलाड़ियों की उपलब्धता को लेकर फ्रेंचाइजियां मुश्किल में होती हैं। वह एक सप्ताह पहले पैसे मांगते हैं।
विवाद
विवाद बढ़ने के बावजूद अपने रुख पर कायम है PCB
विवाद बढ़ने के बावजूद PCB अपने रुख पर कायम है। बोर्ड ने MLC की फ्रेंचाइजियों से कहा है कि इस राशि की मांग करना उसका अधिकार है।
हालांकि, यह शुल्क चुकाने के बाद भी टीमों को किसी तरह की गारंटी नहीं मिलती।
रिपोर्ट के अनुसार, जरूरत पड़ने पर बोर्ड पहले से जारी NOC भी वापस ले सकता है और दोबारा मंजूरी देने के लिए आखिरी समय में फिर अतिरिक्त राशि की मांग कर सकता है।
टी-20
कोई अन्य बोर्ड नहीं मांगता पैसे
रिपोर्ट के अनुसार, MLC की फ्रेंचाइजियों ने PCB की इस मांग पर नाराजगी जताई है।
एक फ्रेंचाइजी ने कहा, "हर सीजन इस राशि के भुगतान को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है।"
उनका यह भी कहना है कि दुनिया का कोई अन्य क्रिकेट बोर्ड उनसे इस तरह का अतिरिक्त शुल्क नहीं मांगता।
टीमें पहले से तय बजट पर काम करती हैं, लेकिन उन्हें अचानक इस शुल्क के लिए बजट से बड़ी राशि अलग करनी पड़ती है।
गेंदबाज
MLC में सिर्फ एक पाकिस्तानी खिलाड़ी खेलेगा
इस सत्र की MLC में हारिस रऊफ एकमात्र पाकिस्तानी खिलाड़ी हैं। उन्हें सैन फ्रांसिस्को यूनिकॉर्न्स ने अपनी टीम में शामिल किया है और फ्रेंचाइजी ने PCB की मांगी गई राशि का भुगतान भी किया है।
रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी खिलाड़ी के घरेलू क्रिकेट बोर्ड को निर्धारित शुल्क देना दुनिया भर की फ्रेंचाइजी लीग में सामान्य प्रक्रिया है।
हालांकि, विवाद अतिरिक्त और अंतिम समय में मांगे जाने वाले शुल्क को लेकर है।