रणजी ट्रॉफी के शेड्यूल पर गावस्कर भड़के, बोले- IPL नीलामी के लिए हो रहा सब कुछ
क्या है खबर?
भारत के महान पूर्व बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने 2026-27 घरेलू क्रिकेट सत्र के कार्यक्रम पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने रणजी ट्रॉफी को 2 हिस्सों में कराने और इसके बीच 2 महीने से ज्यादा का अंतर रखने के फैसले की आलोचना की। रणजी ट्रॉफी का पहला चरण 11 अक्टूबर से 5 नवंबर तक खेला जाएगा, जबकि दूसरा चरण 17 जनवरी, 2027 से शुरू होगा। गावस्कर ने कहा कि इससे प्रथम श्रेणी क्रिकेट की लय और खिलाड़ियों की गति प्रभावित होती है।
शेड्यूल
तीसरे साल लगातार 2 हिस्सों में होगी रणजी ट्रॉफी
बता दें, 2026-27 सत्र में लगातार तीसरे साल रणजी ट्रॉफी को 2 चरणों में कराया जाएगा।
पहले चरण के बाद 14 नवंबर से 8 जनवरी, 2027 तक सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी (टी-20) और विजय हजारे ट्रॉफी (50 ओवर) खेली जाएगी। इस बीच इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की नीलामी भी होगी।
रणजी का दूसरा चरण 17 जनवरी से होगा और फाइनल 27 फरवरी से खेला जाएगा।
गावस्कर के अनुसार, लंबा ब्रेक खिलाड़ियों की लय और गति को खत्म कर देता है।
बयान
सब कुछ IPL नीलामी के लिए हो रहा है- गावस्कर
गावस्कर ने अपने स्पोर्टस्टार कॉलम कहा कि यह सब IPL नीलामी के लिए हो रहा है।
उन्होंने सवाल किया कि सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी को भी बीच में रोककर बाद में नॉकआउट क्यों नहीं कराया जाता?
उन्होंने लिखा, 'सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी को रणजी ट्रॉफी की तरह क्वार्टर फाइनल तक क्यों नहीं खेला जाता, फिर कुछ हफ्तों का ब्रेक लेकर सेमीफाइनल और फाइनल क्यों नहीं कराया जाता? ऐसा इसलिए नहीं होता क्योंकि टूर्नामेंट के तुरंत बाद IPL नीलामी होती है।'
सवाल
"राष्ट्रीय चैंपियनशिप को फिर प्राथमिकता मिलनी चाहिए"
पूर्व भारतीय कप्तान ने रणजी ट्रॉफी को बीच में रोककर सफेद गेंद के टूर्नामेंट को प्राथमिकता देने पर सवाल उठाते हुए कहा, "किसी टूर्नामेंट को सफेद गेंद के टूर्नामेंट के लिए क्यों रोका जाए? रणजी ट्रॉफी राष्ट्रीय चैंपियनशिप है और इसे फिर से प्राथमिकता दी जानी चाहिए, बजाय इसके कि पिछले कुछ वर्षों की तरह इसे इधर-उधर किया जाए।"
गावस्कर के मुताबिक, रणजी ट्रॉफी को IPL नीलामी के लिए खिलाड़ियों के ऑडिशन की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।
चेतावनी
लाल गेंद क्रिकेट की अनदेखी को लेकर दी चेतावनी
गावस्कर ने घरेलू क्रिकेट और लाल गेंद वाले प्रारूप की अनदेखी के भविष्य के असर को लेकर भी चेतावनी दी।
उन्होंने कहा, 'लाल गेंद की क्रिकेट की अनदेखी की गई तो बेहतरीन खिलाड़ियों को तैयार करने की संभावना कम हो जाएगी।'
उन्होंने आगे कहा, 'मौजूदा भारतीय टीम को देखें तो लगभग हर खिलाड़ी लाल गेंद वाले क्रिकेट से होकर आया है। ये खिलाड़ियों को वह आधार देता है, जो सफेद गेंद वाला क्रिकेट शायद ही कभी दे पाता है।'