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फीफा ने रद्द किया अमेरिकी खिलाड़ी का निलंबन, क्या डोनाल्ड ट्रंप ने किया था हस्तक्षेप?
फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प

फीफा ने रद्द किया अमेरिकी खिलाड़ी का निलंबन, क्या डोनाल्ड ट्रंप ने किया था हस्तक्षेप?

संपादन आदर्श कुमार
Jul 06, 2026
10:35 pm

क्या है खबर?

फीफा विश्व कप 2026 में बड़ा विवाद सामने आया है। फीफा ने राउंड ऑफ-32 में रेड कार्ड मिलने के बाद USA फुटबॉल टीम के स्टार खिलाड़ी फोलारिन बालोगुन पर लगे एक मैच के प्रतिबंध को निलंबित कर दिया है। वह अब राउंड ऑफ-16 में बेल्जियम के खिलाफ मैच उपलब्ध रहेंगे। फीफा के निर्णय की यूरोपीय फुटबॉल संघों के संघ (UEFA) ने कड़ी आलोचना की है। इसी तरह इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्तक्षेप की भी बात सामने आई है।

निलंबन

सबसे पहले जानिए बालोगुन पर क्यों लगा था प्रतिबंध

दरअसल, राउंड ऑफ-32 के अहम मुकाबले में USA ने बोस्निया-हर्जेगोविना को 2-0 से हराकर राउंड ऑफ-16 में जगह बनाई थी। उस मुकाबले के 64वें मिनट में गेंद पर कब्जा करने के प्रयास में बालोगुन का पैर विरोधी खिलाड़ी तारिक मुहारेमोविच के टखने पर पड़ गया था। वीडियो सहायक रेफरी (VAR) समीक्षा के बाद बालोगुन को सीधा रेड कार्ड दिखाया गया। फीफा के सामान्य नियमों के तहत रेड कार्ड मिलने पर खिलाड़ी पर अगले मैच का स्वचालित प्रतिबंध लग जाता है।

कदम

फीफा ने कैसे रद्द किया बालोगुन का निलंबन?

फीफा ने अनुशासनात्मक कोड के अनुच्छेद 27 का हवाला देते हुए बालोगुन के एक मैच के प्रतिबंध को एक साल की परिवीक्षा अवधि के लिए टाल दिया है। इसका मतलब है कि बालोगुन का रेड कार्ड पूरी तरह से रद्द नहीं, बल्कि उनका प्रतिबंध समीक्षा के अधीन रख दिया गया है। अगर, वह अगले एक साल में ऐसा ही गंभीर फाउल दोबारा करते हैं, तो यह प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएगा। इस फैसले की खासी चर्चा है।

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आलोचना

UEFA ने की फीफा के फैसले की आलोचना

इसके फैसले को लेकर सोमवार को UEFA ने फीफा पर सीधा निशाना साधा और खेल नियमों के उल्लंघन के रूप में जो कुछ भी वह देखता है, उस पर खुलकर अपनी राय व्यक्त करने से इनकार कर दिया। UEFA ने कहा, "कल USA के खिलाड़ी फोलारिन बालोगुन को दिखाए गए रेड कार्ड के बाद एक मैच के स्वचालित निलंबन के कार्यान्वयन को एक साल की परिवीक्षा अवधि के लिए निलंबित करने का निर्णय एक लक्ष्मण रेखा को पार कर गया।"

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हवाला

UEFA ने दिया नियमों का हवाला

UEFA ने कहा, "फुटबॉल, अन्य सभी खेलों की तरह नियमों पर आधारित है। कभी-कभी नियमों की व्याख्या अलग-अलग तरीके से की जा सकती है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं है। रेड कार्ड मिलने पर एक मैच का स्वतः निलंबन कोई विवेकाधीन विकल्प नहीं है। यह नियमों में निहित एक सिद्धांत है, जिसमें किसी प्रकार का अपवाद नहीं हो सकता, खासकर तब जब टूर्नामेंट के बीच में कई अन्य खिलाड़ी भी इसी स्थिति में रहे हों।"

चेतावनी

UEFA ने दी चेतावनी

UEFA ने कहा कि फीफा का यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल के भरोसे की नींव को खतरे में डालता है। UEFA ने कहा, "जब नियमों की निश्चितता की गारंटी उसके संरक्षकों द्वारा नहीं दी जाती है, तो खेल की निष्ठा खतरे में पड़ जाती है और प्रतियोगिता की विश्वसनीयता कम हो जाती है। ऐसा निर्णय चल रहे टूर्नामेंट में एक मिसाल कायम करता है, जहां अब ऐसी ही स्थितियों में समान व्यवहार की आवश्यकता होगी, जो प्रतियोगिता के लिए हानिकारक होगा।"

सवाल

क्या राष्ट्रपति ट्रंप ने किया था हस्तक्षेप?

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो को फोन कर रेड कार्ड के फैसले की समीक्षा करने को कहा था। अमेरिकी कोच मौरिसियो पोचेटिनो ने भी इस फाउल को पूरी तरह अनजाने में हुआ हादसा बताया था। इसी तरह अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी मामले में दबाव डाला था। इसके बाद फीफा ने फीफा की अनुशासनात्मक समिति ने प्रतिबंध को एक साल की परिवीक्षा अवधि में बदल दिया।

जानकारी

फीफा के फैसला बदलने पर ट्रंप ने दी प्रतिक्रिया

फीफा के प्रतिबंध हटने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर फीफा को धन्यवाद भी दिया है। उन्होंने लिखा, 'एक बड़े अन्याय को पलटने और सही काम करने के लिए फीफा का आभार!'

आलोचना

सेप ब्लैटर ने की खेल में राजनीतिक की निंदा

फीफा के पूर्व अध्यक्ष सेप ब्लैटर फीफा की आलोचना करते हुए कहा कि फुटबॉल को कभी भी राजनीतिक अखाड़ा नहीं बनना चाहिए और राजनीतिक फोन कॉल से किसी खिलाड़ी को दिखाए गए रेड कार्ड रद्द नहीं किए जा सकते। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति फीफा अध्यक्ष से हस्तक्षेप करते हैं और विश्व कप के नॉकआउट मैच से पहले किसी खिलाड़ी को अचानक क्लीन चिट मिल जाती है, तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि फीफा, तुम आगे क्या करोगे?

बयान

पूरे मामले पर ट्रंप का बयान आया सामने 

ट्रंप ने पूरे मामले में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, "मैंने सिर्फ यह कहा था कि इस फैसले की समीक्षा की जाए, क्योंकि मुझे नहीं लगा कि यह फाउल था। मैंने यह बात नहीं कही थी कि आपको फैसला बदलना ही होगा। मैंने बस अपनी बात रखी थी।" मैच के रेफरी राफेल क्लॉस पर भी ट्रंप ने सवाल उठाए। उन्होंने आगे कहा, "रेफरी का फैसला संदेह पैदा करने वाला था और उनके पुराने रिकॉर्ड की भी जांच होनी चाहिए।"

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