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राष्ट्रमंडल खेल 2026: कौन हैं अस्मिता डे, जो जूडो में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय बनीं?
अस्मिता डे राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय बनी हैं

राष्ट्रमंडल खेल 2026: कौन हैं अस्मिता डे, जो जूडो में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय बनीं?

Aug 01, 2026
10:08 am

क्या है खबर?

भारतीय जूडो के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। भारत की 23 वर्षीय जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल (CWG) 2026 में महिलाओं के 48 किलोग्राम भार वर्ग का स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वह CWG में जूडो में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनी हैं। अस्मिता ने बेहद कड़े और रोमांचक फाइनल मुकाबले में कनाडा की हाइडी क्वाक को अतिरिक्त समय में 2-1 से मात देकर पोडियम पर पहला स्थान हासिल किया।

विवरण

अस्मिता ने कैसे हासिल किया स्वर्ण पदक?

फाइनल मैच बेहद कांटे का रहा। दोनों खिलाड़ियों ने मैट पर एक-दूसरे पर मुक्के बरसाए।

क्वाक ने प्रतियोगिता के मध्य में एक पंच के साथ पहला अंक हासिल किया, लेकिन अस्मिता ने भी अपने एक तेज पंच के साथ तुरंत बराबरी कर ली।

मुकाबले के आगे बढ़ने के साथ अस्मिता आत्मविश्वास बढ़ता गया और उन्होंने कई आक्रामक दांव खेले।

हालांकि, उनके कुछ लॉक प्रयासों से अंक नहीं मिले, फिर भी उन्होंने क्वाक के जवाबी हमलों के खिलाफ नियंत्रण बनाए रखा।

जीत

अस्मिता ने अतिरिक्त समय में दर्ज की जीत

निर्धारित समय के अंत में स्कोर बराबर रहने के कारण मुकाबला गोल्डन स्कोर (अतिरिक्त समय) में पहुंचा।

वहां अस्मिता ने मैट के किनारे के पास एक शानदार थ्रो करके विजयी अंक हासिल किया और स्वर्ण पदक जीता।

इससे पहले अपने अभियान में उन्होंने क्वार्टर फाइनल में स्कॉटलैंड की ईवा इविंग पर एक शानदार इप्पोन जीत हासिल की थी और तनावपूर्ण गोल्डन स्कोर सेमीफाइनल में स्कॉटलैंड की सारा एडलिंगटन को हराकर पदक सुनिश्चित किया था।

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सफर

अस्मिता ने कैसे तय किया मिट्टी के घर से स्वर्ण पदक तक का सफर?

अस्मिता का जन्म 22 मार्च, 2003 को दक्षिण त्रिपुरा के बेलोनिया में हुआ था। उनका परिवार एक साधारण मिट्टी के घर में रहता था।

उनके दिवंगत पिता अर्जुन डे साइकिल मरम्मत की एक छोटी सी दुकान चलाते थे। वह रोजाना करीब 300 रुपये कमाते थे।

दिसंबर 2025 में उनके पिता का ब्रेन स्ट्रोक के कारण निधन हो गया था। पिता की मौत से अस्मिता पूरी तरह टूट चुकी थीं और खेल छोड़ने का मन बना रही थीं।

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प्रेरणा

मां की प्रेरणा ने किया प्रेरित

राष्ट्रमंडल खेलों के चयन ट्रायल से ठीक पहले पिता के निधन से टूटी अस्मिता को उनकी मां ने उन्हें संभाला।

मां ने कहा था कि अगर आज खेल रोक दिया, तो यह उनके पिता के देखे गए सपनों को तोड़ने जैसा होगा।

इसके बाद उन्होंने हिम्मत जुटाई और भोपाल स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) केंद्र में अभ्यास शुरू कर दिया।

उन्होंने प्रतियोगिता के लिए कड़ी मेहनत की, जिसका फल मिल गया है। वह वर्तमान उत्तर प्रदेश पुलिस में कार्यरत हैं।

शुरुआत

अस्मिता ने एथलेटिक्स से की थी खेल करियर की शुरुआत

अस्मिता ने अपने खेल जीवन की शुरुआत 800 मीटर धावक के रूप में की थी।

वह एथलेटिक्स में अच्छी थीं और जिला स्तरीय ट्रायल्स तक पहुंची थीं, लेकिन बाद में एक कोच की सलाह पर उन्होंने जूडो मैट का रुख किया।

घरेलू स्तर पर स्कूल गेम्स और खेलो इंडिया सर्किट में शानदार प्रदर्शन के बाद साल 2018 में उन्हें भोपाल स्थित SAI क्षेत्रीय केंद्र में चुना गया।

वहां उन्होंने अनुभवी कोच यशपाल सोलंकी की देखरेख में अपने खेल को निखारा।

उपलब्धियां

अस्मिता ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हासिल की है ये सफलताएं

अस्मिता साल 2022 में थाईलैंड में आयोजित एशियन कैडेट एंड जूनियर जूडो चैंपियनशिप में पदक जीतकर त्रिपुरा की पहली अंतरराष्ट्रीय जूडो पदक विजेता बनी थी।

उन्होंने साल 2023 मकाऊ में आयोजित जूनियर एशिया कप में स्वर्ण पदक और कुवैत में एशियन ओपन में रजत पदक जीता था।

उन्होंने साल 2025 में मोरक्को में कासाब्लांका अफ्रीकन ओपन अपना पहला सीनियर अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीता था।

इसी तरह वह एशियन सीनियर चैंपियनशिप 2026 में 5वें स्थान पर रही थीं।

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