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राष्ट्रमंडल खेल 2026: तुवालू की मुक्केबाज ने बिना मुकाबला जीते हासिल की कांस्य पदक, जानिए कैसे
तुवालू की मुक्केबाज तारोना ताफाकी ने राष्ट्रमंडल खेल 2026 में अपने देश के लिए पहला कांस्य पदक जीता है

राष्ट्रमंडल खेल 2026: तुवालू की मुक्केबाज ने बिना मुकाबला जीते हासिल की कांस्य पदक, जानिए कैसे

Aug 01, 2026
05:00 pm

क्या है खबर?

तुवालू की मुक्केबाज तारोना ताफाकी ने राष्ट्रमंडल खेल 2026 में अपने देश के लिए पहला कांस्य पदक जीता है। बड़ी बात यह रही कि ताफाकी ने मुक्केबाजी स्पर्धा में कोई मुकाबला जीते बिना ही यह पदक हासिल किया। उन्हें महिलाओं के 75 किलोग्राम वर्ग में भारत की लवलीना बोरगोहेन के खिलाफ अपने एकमात्र सेमीफाइनल मुकाबले में हार का सामना किया। टूर्नामेंट की संरचना के कारण यह अप्रत्याशित घटना घटी। ऐसे में आइए जानते हैं उन्होंने यह पदक कैसे जीता।

सवाल

ताफाकी को हार के बाद भी क्यों मिला पदक?

महिलाओं के 75 किलोग्राम भार वर्ग में केवल 5 मुक्केबाजों ने हिस्सा लिया था।

खिलाड़ियों की संख्या इतनी कम होने के कारण टूर्नामेंट का ड्रॉ इस तरह तैयार हुआ कि कुछ खिलाड़ियों को सीधे सेमीफाइनल में प्रवेश मिल गया।

लॉटरी के जरिए तारोना ताफाकी को पहले दौर में डायरेक्ट 'बाय' मिल गई।

इससे उन्हें क्वार्टर फाइनल या कोई अन्य शुरुआती मैच खेलने की जरूरत नहीं पड़ी और वे बिना रिंग में उतरे सीधे सेमीफाइनल में पहुंच गईं।

जानकारी

बॉक्सिंग के इस नियम में दिलाया पदक

राष्ट्रमंडल खेल और ओलंपिक में मुक्केबाजी स्पर्धा का नियम है कि सेमीफाइनल में हारने वाले दोनों खिलाड़ियों को कांस्य पदक दिया जाता है। इसमें तीसरे स्थान के लिए कोई अलग से मैच नहीं होता है। ऐसे में ताफाकी को कांस्य पदक मिला।

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बयान

तुवालू के लोगों के लिए बहुत मायने रखता है यह पदक- कोच

ताफाकी के कोच और पिता बदी ताफाकी ने तुवालू के लिए इस पदक के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, "तुवालू के लोगों के लिए यह पदक बहुत मायने रखता है।"

उन्होंने यह भी बताया कि दुनिया के सबसे छोटे देशों में से एक होने के बावजूद इस तरह का पदक बेहद महत्वपूर्ण है।

बता दें कि बदी ताफाकी के बेटे पासोनी ने इन खेलों में पहले ही 70 किलोग्राम वर्ग में अपना एकमात्र मुकाबला हार गए थे।

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तारीफ

ताफाकी और पासोनी मुक्केबाजी करने वाले 8 भाई-बहनों में से दूसरे सबसे बड़े

ताफाकी और पासोनी मुक्केबाजी करने वाले 8 भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं। वे न्यूजीलैंड में प्रशिक्षण लेते हैं, जहां बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हैं।

बदी ताफाकी ने कहा, "मेरे बच्चे बहुत भाग्यशाली हैं। उन्हें वे अवसर और सुविधाएं प्राप्त हैं जो मुझे कभी नहीं मिलीं।"

उन्होंने कहा कि मुक्केबाजी ही उनका पूरा जीवन है और ताकत उनके खून में ही है।

द्वीप पर मौजूद एथलीट सबसे स्थिर भूभाग माने जाने वाले हवाई अड्डे के रनवे पर प्रशिक्षण लेते हैं।

पुनरावृत्ति

राष्ट्रमंडल खेलों में पहले भी हो चुका है यह कारनामा

दिलचस्प बात यह है कि ताफाकी राष्ट्रमंडल खेलों में बिना कोई मुकाबला जीते पदक जीतने वाली पहली मुक्केबाज नहीं हैं।

ESPN के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया की टायलाह रॉबर्टसन ने भी 2018 में गोल्ड कोस्ट में महिलाओं के फ्लाईवेट वर्ग में कांस्य पदक जीता था। वह इंग्लैंड की लिसा व्हाइटसाइड से अपना मुकाबला हार गई थी।

बदी ताफाकी को उम्मीद है कि यह पदक तुवालू में जलवायु परिवर्तन की आपात स्थिति को उजागर करेगा।

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