राष्ट्रमंडल खेल 2026: पैरा एथलीट शर्मिला धनखड़ ने घरेलू हिंसा से निकलकर कैसे जीता स्वर्ण पदक?
क्या है खबर?
भारत की 40 वर्षीय पैरा एथलीट शर्मिला धनखड़ ने ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में इतिहास रच दिया। उन्होंने महिलाओं की शॉट पुट F57 स्पर्धा में 9.81 मीटर का थ्रो फेंककर स्वर्ण पदक हासिल किया। बचपन में पोलियो से जूझने के बाद धनखड़ ने वैवाहिक जीवन में घरेलू हिंसा का सामना किया। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और खेल के मैदान पर शानदार वापसी की। उनका सफर संघर्ष और चुनौतियों से भरा रहा है। आइए उनकी संघर्षपूर्ण कहानी जानते हैं।
महत्व
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है धनखड़ का यह पदक?
धनखड़ ने इस स्वर्ण पदक ने राष्ट्रमंडल खेलों के इस वर्ग में भारत के 2 दशक लंबे सूखे को समाप्त कर दिया।
पैरा एथलेटिक्स में भारत ने आखिरी बार 2006 में पदक जीता था, जब रंजीत कुमार जयसीलन ने पुरुषों के सीटेड डिस्कस थ्रो में पदक जीता था।
महिलाओं के शॉट पुट की F57 श्रेणी उन एथलीटों के लिए है जिनके निचले अंगों में विकलांगता, अंगों की कमी या मांसपेशियों की शक्ति में कमी होती है।
संघर्ष
2 वर्ष की आयु में ही शुरू हो गया था धनखड़ का संघर्ष
धनखड़ का पालन-पोषण हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में गरीबी में हुआ। उन्हें 2 साल की उम्र में पोलियो हो गया था, जिससे उनका दाहिना पैर प्रभावित हुआ था।
उनके पिता किसान थे और उसकी मां दृष्टिहीन थी। दिव्यांगता के साथ बड़ी हो रही धनखड़ के लिए परिस्थितियां आसान नहीं थीं।
समाज के ताने और शारीरिक अक्षमता ने उन्हें लाचार बना दिया, लेकिन उनके भीतर एक जुझारूपन था और उसी ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
हिंसा
घरेलू हिंसा ने तोड़ दी थी धनखड़ की हिम्मत
धनखड़ के माता-पिता ने महज 19 साल की उम्र में 10वीं की पढ़ाई के बाद उनकी शादी कर दी। इसके बाद घरेलू हिंसा के अंधकार ने उन्हें घेर लिया।
उन्होंने TOI से कहा, "मेरा पति शराब पीता था और आए दिन मारपीट करता था। इस दौरान मैने 2 बेटियों (अंजू और लक्ष्मी) को जन्म दिया। एक रात मेरे पति शराब के नशे में मुझे रात 11 बजे से सुबह 3 बजे तक पीटा और घर से बाहर निकाल दिया।"
किस्मत
दूसरी शादी के बाद बदली धनखड़ की किस्मत
धनखड़ ने कहा, "पहले पति द्वारा घर से निकालने के बाद मैं 6 साल पीहर में रही। इसके बाद परिजनों ने अजीत सिंह नाम के युवक से दूसरी शादी कर दी।"
उन्होंने कहा, "मैं शुरुआत में घबराई हुई थी, लेकिन अजीत ने मेरा डर खत्म कर दिया। उनकी किराने की दुकान थी और उन्होंने दोनों बेटियों के साथ मुझे अपनाया था। 34 साल की उम्र में उन्होंने मुझे पैरा खेलों से अवगत कराया और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।"
प्रोत्साहन
अजीत ने धनखड़ को अभ्यास के लिए किया प्रोत्साहित
धनखड़ ने बताया कि उनके पति के समर्थन से उन्होंने व्हीलचेयर पर बैठकर F57 श्रेणी में शॉट पुट का अभ्यास शुरू किया।
अजीत ने रोहतक में अभ्यास के दौरान उन्हें कोच संदीप पुनिया, टेक चंद और देवेंद्र से मिलवाया, जिन्होंने उनकी मानसिक ताकत को पहचाना और उनकी तकनीक को तराशा।
इसके बाद उन्होंने 2021 में पैरा राष्ट्रीय चैंपियनशिप में पदार्पण किया और राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता। हालांकि, राष्ट्रमंडल खेल 2022 में वह पदक से चूक गईं।
चुनौती
धनखड़ ने किया वित्तीय चुनौतियों का सामना
अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए धनखड़ के परिवार ने 2023 में रेवाड़ी में अपना घर बेच दिया और वित्तीय चुनौतियों का सामना करते हुए किराए के मकान में रहने लगे।
वह अपनी बेटियों को भी अवसर प्रदान करना चाहती हैं, जो उन्हें कभी नहीं मिले। उनकी दोनों बेटियां उभरती हुई एथलीट हैं।
अंजू अंडर-16 भाला फेंक प्रतियोगिता में भाग लेती हैं जबकि लक्ष्मी अंडर-14 लंबी कूद की खिलाड़ी हैं।
अब धनखड़ का सपना नया घर खरीदने का है।