एशियाई खेल: अफगान साइकिलिस्ट ने तालिबान से बचने के लिए पुरुष का भेष अपनाया, जीता रजत
क्या है खबर?
अफगानिस्तान की साइकिलिस्ट फरीबा हाशिमी ने अपने सपने को पूरा करने के लिए पुरुष का भेष अपनाया और एशियाई खेल 2026 में रजत पदक जीत लिया। मंगलवार को मिली इस सफलता के बाद उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी उपलब्धि अफगानिस्तान की अन्य महिलाओं को भी प्रेरित करेगी। तालिबान के शासन के बाद देश में महिलाओं की स्वतंत्रता पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गई हैं। इसके बावजूद फरीबा ने अपने सपने को आगे बढ़ाया और पदक हासिल किया।
इटली
बचपन में लोगों ने किया पत्थरों से हमला
इटली की रहने वाली 23 वर्षीय हाशिमी ने नागोया में हुए महिला रोड रेस में दूसरा स्थान हासिल कर रजत पदक जीता।
उन्होंने अपनी इस उपलब्धि को खास बताया। उन्होंने कहा कि वह अपनी भावनाओं को शब्दों में बयां नहीं कर सकतीं।
उन्होंने बताया कि बचपन में खेल की शुरुआत के दौरान उन पर पत्थरों से हमला किया गया था।
उन्होंने अपनी बहन युलदुज के साथ पुरुष का भेष अपनाकर प्रशिक्षण लिया जो अब पेशेवर साइकिलिस्ट हैं।
बयान
मुझे खुशी है मैंने संघर्ष किया- हाशिमी
हाशिमी ने कहा, "मैं ऐसे देश में पैदा हुई जहां सपने देखने वाली महिलाओं पर हमले किए जाते हैं। मुझे खुशी है कि मैंने इसके खिलाफ संघर्ष किया। मैं उम्मीद करती हूं कि अगली पीढ़ी की महिलाएं यहां आएंगी और बिना किसी डर के अपने देश का प्रतिनिधित्व करेंगी।"
उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई सिर्फ उनके लिए नहीं थी, बल्कि उन महिलाओं के लिए भी थी जो अपने सपनों को पूरा करना चाहती हैं।
आजादी
मेरे साथ लाखों महिलाएं खड़ी हैं- हाशिमी
हाशिमी ने आगे कहा, "उन्होंने हमारी आजादी छीन ली हमसे सब कुछ छीन लिया। यह रजत पदक अफगान महिलाओं के दृढ़ संकल्प को दिखा सकता है और मैं इससे बहुत खुश हूं। मैं अकेली नहीं हूं। मुझे पता है कि मेरे पीछे कई देशों की लाखों महिलाएं हैं, जिनका भी यही सपना है और वे मेरे साथ खड़ी हैं।"
उत्तरी अफगानिस्तान के फरीयाब प्रांत की रहने वाली हाशिमी तालिबान के सत्ता संभालने के बाद देश छोड़ चुकी हैं।
मदद
इटली रहती हैं हाशिमी
अफगानिस्तान से निकलने के बाद हाशिमी इटली की पूर्व विश्व चैंपियन एलेसांद्रा कैप्पेलोटो की मदद से इटली पहुंचीं।
इसके बाद उन्होंने वहीं अपना ठिकाना बनाया और अब प्रशिक्षण भी ले रही हैं।
फरीबा और उनकी बहन युलदुज ने 2 साल पहले पेरिस ओलंपिक में भी हिस्सा लिया था।
अब उनकी नजर 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक पर है। दोनों बहनों ने अफगानिस्तान छोड़ने के बाद इटली में रहकर अपने साइकिलिंग करियर को आगे बढ़ाया है।