एशियाई खेल 2026: भारतीय हॉकी टीमें फिर से नीली जर्सी में दिखेंगी, केसरिया रंग होगा वैकल्पिक
क्या है खबर?
भारतीय हॉकी टीम की जर्सी के रंग को लेकर पिछले कुछ समय से चल रहा विवाद खत्म हो गया है। हॉकी इंडिया (HI) ने अपने पिछले फैसले को बदलते हुए आगामी एशियाई खेल 2026 के लिए एक बार फिर 'नीले' रंग को टीम की प्राथमिक जर्सी का रंग चुन लिया है। वहीं विवादों में रहे 'केसरिया' रंग को अब सेकेंडरी (वैकल्पिक) जर्सी के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। हॉकी इंडिया के कोषाध्यक्ष शेखर मनोहरन ने इसकी पुष्टि की है।
बयान
मनोहरन ने क्या दिया बयान?
कोषाध्यक्ष मनोहरन ने मंगलवार को कहा, "भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) ने हमसे हॉकी टीमों के किट के लिए हमारे पसंदीदा रंग पर सुझाव मांगा था। इस पर हॉकी इंडिया ने अपनी पहली प्राथमिकता 'नीले' रंग को दी है, जबकि सेकेंडरी कलर के रूप में 'केसरिया' को चुना गया है।"
बता दें कि नीदरलैंड और बेल्जियम में हुए हॉकी विश्व कप 2026 से ठीक पहले भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग बदलकर केसरिया कर दिया गया था।
तर्क
हॉकी इंडिया ने क्या दिया था रंग बदलने का तर्क?
हॉकी इंडिया विश्व कप से पहले टीम की जर्सी का रंग बदलने को लेकर कहा था कि यह फैसला खिलाड़ियों और कोचों के तकनीकी फीडबैक पर आधारित था।
उनका दावा था कि मैदान का सामान्य टर्फ भी नीले रंग का होता है, ऐसे में नीली जर्सी पहनने से मैच के दौरान दृश्यता प्रभावित होती है।
खिलाड़ियों ने पीले और नारंगी रंग का सुझाव दिया था, जिसमें से बोर्ड ने राष्ट्रीय ध्वज के महत्व को देखते हुए केसरिया को चुना।
विरोध
इन दिग्गजों ने किया था विरोध
हॉकी दिग्गज धनराज पिल्ले, परगट सिंह और वीरेन रसकिन्हा जैसे भारत के कई पूर्व कप्तानों ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा था कि यह टीम की सालों पुरानी पहचान को खत्म करने जैसा है।
वहीं, भारतीय हॉकी के बड़े समर्थक माने जाने वाले ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक सहित कई राजनेताओं ने इस बदलाव की निंदा करते हुए इसे राजनीति से प्रेरित बताया था।
हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की भी इस फैसले से अनजान थे।