ISS को समुद्र में गिराने की नासा की योजना पर क्यों उठे सवाल?
क्या है खबर?
अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) को 2030 के आसपास रिटायर करने की तैयारी के बीच नासा की योजना पर सवाल उठने लगे हैं। एजेंसी स्टेशन को नियंत्रित तरीके से दक्षिणी प्रशांत महासागर के पॉइंट नीमो क्षेत्र में गिराने की योजना बना रही है। हालांकि, समुद्री पर्यावरण से जुड़े कई विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रक्रिया से पर्यावरण और अंतरराष्ट्रीय नियमों से जुड़े कई सवाल खड़े हो सकते हैं। इससे इस योजना पर लगातार बहस और चर्चा हो रही है।
चिंता
समुद्री पर्यावरण को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?
री-एंट्री के दौरान ISS का अधिकांश हिस्सा जल जाएगा, लेकिन भारी धातु और दूसरे मजबूत हिस्से समुद्र तल तक पहुंच सकते हैं। उनका मानना है कि इन अवशेषों का समुद्री जीवों और पर्यावरण पर क्या असर पड़ेगा, इसकी पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। इसी वजह से कई वैज्ञानिक इस योजना पर अधिक अध्ययन और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि पहले सभी संभावित जोखिमों का विस्तृत आकलन जरूरी है।
सवाल
अंतरराष्ट्रीय नियमों पर भी उठ रहे सवाल
मौजूदा अंतरराष्ट्रीय नियम जमीन पर होने वाले नुकसान के लिए मुआवजे की बात करते हैं, लेकिन खुले समुद्र में गिरने वाले अंतरिक्ष मलबे के लिए स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। उनका कहना है कि महासागर किसी भी तरह कम महत्वपूर्ण नहीं हैं और उनके संरक्षण के लिए भी स्पष्ट नियम होने चाहिए। इसी कारण इस योजना को लेकर कानूनी और पर्यावरणीय बहस तेज हो गई है। इस विषय पर वैश्विक स्तर पर नए नियम बनाने की मांग भी उठ रही है।
मांग
हवा और समुद्र दोनों पर असर जानने की मांग
वैज्ञानिकों का कहना है कि ISS की री-एंट्री अब तक की सबसे बड़ी नियंत्रित अंतरिक्ष वापसी होगी। इसलिए केवल समुद्र ही नहीं, बल्कि वायुमंडल पर इसके असर का भी विस्तृत अध्ययन होना चाहिए। उनका मानना है कि कौन-से पदार्थ बचेंगे और उनका पर्यावरण पर क्या प्रभाव होगा, इसकी पूरी जानकारी पहले सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि संभावित जोखिमों का सही आकलन किया जा सके। इससे भविष्य की ऐसी योजनाओं को और सुरक्षित बनाया जा सकेगा।
जांच
नासा से विस्तृत जांच की मांग
समुद्री संरक्षण से जुड़े संगठनों ने नासा और अंतरराष्ट्रीय नियामक संस्थाओं से इस पूरी प्रक्रिया का व्यापक पर्यावरणीय आकलन करने की मांग की है। यह भी कहा गया है कि समुद्र में गिरने वाले मलबे, उसकी प्रकृति और संभावित प्रभावों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। भविष्य में बड़े अंतरिक्ष यानों के सुरक्षित निपटान के लिए स्पष्ट और मजबूत वैश्विक नियम बनाना बेहद जरूरी होगा, ताकि पर्यावरण और समुद्री जीवन पर किसी तरह का अनावश्यक खतरा न बढ़े।