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ISRO गगनयान मिशन में आम नागरिकों को क्यों करना चाहता है शामिल?
गगनयान मिशन में आम नागरिकों को शामिल करने की तैयारी

ISRO गगनयान मिशन में आम नागरिकों को क्यों करना चाहता है शामिल?

Apr 27, 2026
05:51 pm

क्या है खबर?

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अपने गगनयान मिशन पर तेजी से काम कर रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) की रिपोर्ट के अनुसार भविष्य के गगनयान मिशन में ISRO आम नागरिकों को भी अंतरिक्ष में ले जाने की योजना बना रहा है। माना जा रहा है कि आम नागरिकों को शुरुआती तीन मिशन के बाद, यानी चौथे गगनयान मिशन से अंतरिक्ष में भेजा जा सकता है, जिससे इस योजना को लेकर नई उम्मीदें और संभावनाएं तेजी से बढ़ी हैं।

योजना

गगनयान मिशन क्या है और इसकी योजना?

गगनयान मिशन ISRO का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है। इसके तहत तीन अंतरिक्ष यात्रियों को करीब 400 किलोमीटर ऊंची कक्षा में तीन दिन के लिए भेजा जाएगा और फिर सुरक्षित वापस लाया जाएगा। पहले बैच में सभी एस्ट्रोनॉट्स एयर फोर्स के टेस्ट पायलट हैं। लेकिन अब दूसरे बैच में बदलाव की तैयारी है, जिसमें आम नागरिकों को भी शामिल करने का प्लान बनाया जा रहा है और चयन प्रक्रिया पर तेजी से काम हो रहा है।

वजह

क्यों आम नागरिकों को मौका देना चाहता है ISRO?

ISRO का मानना है कि भविष्य में अंतरिक्ष मिशन सिर्फ सैन्य पायलट तक सीमित नहीं रहेंगे। वैज्ञानिक प्रयोग, रिसर्च और स्पेस स्टेशन जैसे बड़े लक्ष्यों के लिए अलग-अलग विशेषज्ञों की जरूरत होगी। इसलिए STEM बैकग्राउंड वाले सिविलियन को शामिल करने की योजना बनाई गई है। इससे अंतरिक्ष में नए प्रयोग और रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा और भारत का स्पेस प्रोग्राम और ज्यादा मजबूत तथा आत्मनिर्भर बनेगा।

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अंतरिक्ष यात्री

दूसरे बैच में ऐसे होंगे अंतरिक्ष यात्री

रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरे बैच में कुल 10 अंतरिक्ष यात्री शामिल होंगे, जिनमें 6 मिलिट्री पायलट और 4 नागरिक विशेषज्ञ शामिल होंगे। ये सिविलियन वैज्ञानिक, इंजीनियर या टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट हो सकते हैं। माना जा रहा है कि ये लोग गगनयान के चौथे मिशन से अंतरिक्ष यात्रा में हिस्सा लेना शुरू करेंगे, जिससे आम लोगों की भागीदारी धीरे-धीरे बढ़ेगी और नए अवसर भी सामने आएंगे।

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तैयारी

ट्रेनिंग और भविष्य की तैयारी

एक एस्ट्रोनॉट को तैयार करने में करीब 4.5 साल का समय लगता है, जिसमें कड़ी ट्रेनिंग और कई टेस्ट शामिल होते हैं। ISRO फिलहाल एक अस्थायी ट्रेनिंग सेंटर चला रहा है और आगे स्थायी केंद्र बनाने की योजना है। कुल मिलाकर ISRO 40 एस्ट्रोनॉट्स का कैडर तैयार करना चाहता है। यह कदम भारत के भविष्य के स्पेस स्टेशन और लंबे समय तक अंतरिक्ष में मौजूद रहने की महत्वाकांक्षी योजना का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

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