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क्यों अलग-अलग रंगों में नजर आता है ऑरोरा?
यह हरे, लाल, नीले और बैंगनी रंगों की चमकदार लहरों जैसा लगता है

क्यों अलग-अलग रंगों में नजर आता है ऑरोरा?

Jan 28, 2026
09:35 am

क्या है खबर?

अंतरिक्ष मौसम में बदलाव से दिखने वाला ऑरोरा कुदरत का बेहद सुंदर और रंगीन आसमानी नजारा है। यह हरे, लाल, नीले और बैंगनी रंगों की चमकदार लहरों जैसा लगता है और ज्यादातर पृथ्वी के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों के पास दिखाई देता है। ऑरोरा तब दिखता है जब सूरज से आने वाले ऊर्जा से भरे कण पृथ्वी के वातावरण से टकराते हैं। तेज सोलर एक्टिविटी के समय यह नजारा और भी ज्यादा चमकीला और दूर तक दिखाई देने लगता है।

निर्माण

ऑरोरा कैसे बनते हैं?

ऑरोरा तब बनते हैं जब सूरज से निकलने वाले चार्ज्ड कण, जिन्हें सोलर विंड कहा जाता है, पृथ्वी तक पहुंचते हैं। पृथ्वी का मैग्नेटिक फील्ड इन कणों को ध्रुवों की ओर मोड़ देता है। वहां ये कण ऊपरी वातावरण में मौजूद ऑक्सीजन और नाइट्रोजन गैस से टकराते हैं। इस टक्कर से गैस के कण ऊर्जा छोड़ते हैं, जो रोशनी के रूप में दिखाई देती है। इसी रोशनी से आसमान में नाचते हुए ऑरोरा बनते हैं।

वजह

ऑरोरा के अलग-अलग रंग क्यों होते हैं?

ऑरोरा के रंग इस बात पर निर्भर करते हैं कि कौन-सी गैस से टक्कर हुई और वह टक्कर कितनी ऊंचाई पर हुई। हरा रंग सबसे आम होता है, जो ऑक्सीजन गैस से बनता है। लाल ऑरोरा बहुत ऊंचाई पर और तेज सोलर तूफान में दिखते हैं। नीले और बैंगनी रंग नाइट्रोजन गैस से बनते हैं और जमीन के करीब दिखाई देते हैं। अलग-अलग गैसें अलग तरंगों की रोशनी छोड़ती हैं, इसलिए ऑरोरा रंगीन दिखते हैं।

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अन्य

सौर तूफान और दूसरे ग्रहों पर ऑरोरा

तेज सौर तूफान ऑरोरा को और ज्यादा चमकीला और फैलाव वाला बना देते हैं। ऐसे समय में ऑरोरा ध्रुवों से दूर देशों में भी दिख सकता है। ऑरोरा सिर्फ पृथ्वी पर ही नहीं होते। जुपिटर, सैटर्न, यूरेनस और नेपच्यून जैसे ग्रहों पर भी ऑरोरा देखे गए हैं। वैज्ञानिक सैटेलाइट और जमीन पर लगे कैमरों से ऑरोरा का अध्ययन करते हैं, ताकि सूरज और पृथ्वी के रिश्ते को बेहतर समझा जा सके।

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