AI की चिंता और असर को लेकर AI इंपैक्ट समिट 2026 क्यों है जरूरी?
क्या है खबर?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर दुनियाभर में उत्साह के साथ-साथ गहरी चिंता भी देखी जा रही है। नौकरियों पर असर, डाटा सुरक्षा, फेक कंटेंट और ऑटोमेशन के कारण बड़े बदलाव की आशंका ने कई देशों को सतर्क कर दिया है। कंपनियां तेजी से AI अपना रही हैं, लेकिन इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभाव पर बहस जारी है। ऐसे माहौल में साफ नियम, जिम्मेदार इस्तेमाल और संतुलित विकास की जरूरत पहले से ज्यादा महसूस की जा रही है।
मंच
दिल्ली में वैश्विक संवाद का मंच
इन्हीं चिंताओं और संभावनाओं के बीच दिल्ली में आयोजित AI समिट को अहम माना जा रहा है। यह सिर्फ टेक्नोलॉजी का कार्यक्रम नहीं, बल्कि नीति, समाज और उद्योग के बीच संवाद का मंच है। यहां सरकारें, टेक कंपनियां, स्टार्टअप, शोध संस्थान और नागरिक संगठनों के प्रतिनिधि एक साथ बैठकर चर्चा कर रहे हैं। मकसद यह समझना है कि AI को कैसे सुरक्षित, पारदर्शी और सबके हित में इस्तेमाल किया जाए।
फोकस
चिंता से आगे बढ़कर असर पर फोकस
अब बहस केवल इस बात पर नहीं है कि AI से क्या खतरा है, बल्कि इस पर है कि इसका सही इस्तेमाल कैसे किया जाए। समिट में हेल्थ, एजुकेशन, खेती, न्याय व्यवस्था और रोड सेफ्टी जैसे क्षेत्रों में AI के व्यावहारिक उपयोग पर चर्चा हो रही है। यह देखा जा रहा है कि कैसे डाटा आधारित फैसले लोगों की जिंदगी बेहतर बना सकते हैं। यह तय किया जा रहा है कि तकनीक का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।
भविष्य
भारत की भूमिका और भविष्य की दिशा
भारत खुद को AI के उपभोक्ता के बजाय निर्माता के रूप में स्थापित करना चाहता है। देश की बड़ी युवा आबादी, मजबूत डिजिटल ढांचा और तेजी से बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम इसे खास बनाता है। दिल्ली समिट इस दिशा में एक संकेत है कि भारत वैश्विक AI नीति और विकास में सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है। अगर सही संतुलन बनाया गया, तो AI केवल बदलाव नहीं लाएगा, बल्कि व्यापक और समावेशी विकास का माध्यम बन सकता है।