रील्स देखते-देखते क्यों बढ़ जाता है स्क्रॉलिंग टाइम? नए अध्ययन में सामने आया कारण
क्या है खबर?
सोशल मीडिया पर कुछ मिनट के लिए वीडियो देखने बैठना कई बार लंबे स्क्रॉल में बदल जाता है। अब एक नई वैज्ञानिक अध्ययन ने इस आदत के पीछे दिमाग की गतिविधि से जुड़ा एक संकेत दिया है। शोधकर्ताओं ने पाया कि पसंदीदा छोटे वीडियो देखते समय ध्यान और व्यवहार पर नियंत्रण रखने वाले दिमागी हिस्सों में गतिविधि कम हो सकती है। यह अध्ययन 56 युवाओं पर किया गया और इसके नतीजे 'न्यूरोइमेज' जर्नल में प्रकाशित हुए हैं।
गतिविधि
शोधकर्ताओं ने दिमाग की गतिविधि कैसे देखी?
अध्ययन में शामिल युवाओं को अपनी पसंद के छोटे वीडियो देखने दिए गए और इस दौरान उनके दिमाग की गतिविधि पर नजर रखी गई।
शोधकर्ताओं ने इसके लिए fMRI तकनीक का इस्तेमाल किया। साथ ही, दिमाग में मौजूद ग्लूटामेट और GABA जैसे रसायनों की जांच के लिए मैग्नेटिक रेजोनेंस स्पेक्ट्रोस्कोपी का भी इस्तेमाल हुआ।
रिसर्च में खासतौर पर dACC और dlPFC हिस्सों को देखा गया, जो ध्यान, फैसले और खुद पर नियंत्रण से जुड़े माने जाते हैं।
ध्यान
पसंद आने वाले वीडियो पर दिमाग का ध्यान ज्यादा
जब प्रतिभागियों ने ऐसे वीडियो देखे जो उन्हें ज्यादा पसंद आए और जिन्हें उन्होंने अंत तक देखा, तब dACC और dlPFC में गतिविधि कम दिखाई दी।
वहीं, इन दोनों हिस्सों के बीच आपसी संपर्क मजबूत हुआ। शोधकर्ताओं के अनुसार, संभव है कि पसंदीदा वीडियो देखने के दौरान दिमाग का ध्यान कंटेंट पर ज्यादा केंद्रित हो जाता है।
यही कारण हो सकता है कि लगातार मनोरंजक वीडियो देखते समय व्यक्ति को बीच में रुकना या फोन अलग रखना कठिन महसूस हो।
अध्ययन
अध्ययन ने स्थायी नुकसान की पुष्टि नहीं की
शोधकर्ताओं ने यह दावा नहीं किया है कि रील्स या शॉर्ट वीडियो देखने से दिमाग को स्थायी नुकसान होता है।
इससे पहले की कुछ रिसर्च में भी लगातार छोटे वीडियो देखने और ध्यान या याददाश्त से जुड़े कामों के बीच संबंध देखा गया है। हालांकि, ऐसे अध्ययनों से कारण और प्रभाव की सीधी पुष्टि नहीं होती।
मौजूदा अध्ययन सीमित परिस्थितियों में की गई है। इसलिए फिलहाल इसे शॉर्ट वीडियो के असर का एक शुरुआती वैज्ञानिक संकेत माना जा रहा है।