नासा ने अंतरिक्ष में क्यों भेजी थीं 3,400 मधुमक्खियां? जानिए क्या हुआ इस मिशन से हासिल
क्या है खबर?
अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने 1984 में करीब 3,400 मधुमक्खियों को स्पेस शटल डिस्कवरी के साथ अंतरिक्ष में भेजा था। यह कोई सामान्य अंतरिक्ष यात्रा नहीं थी, बल्कि एक वैज्ञानिक प्रयोग था। नासा यह समझना चाहता था कि धरती की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के बिना मधुमक्खियां कैसे व्यवहार करती हैं और क्या वे अंतरिक्ष में अपना छत्ता बना सकती हैं। इस प्रयोग के जरिए वैज्ञानिक यह जानना चाहते थे कि मधुमक्खियों की प्राकृतिक क्षमता अंतरिक्ष के अलग माहौल में कितनी बदलती है।
मिशन
मिशन में आखिर क्या पता लगाना था?
धरती पर मधुमक्खियां छत्ता बनाते समय गुरुत्वाकर्षण और एक-दूसरे के संपर्क से दिशा का अंदाजा लगाती हैं।
इसी वजह से वैज्ञानिकों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण था कि माइक्रोग्रैविटी में उनका व्यवहार कैसा रहेगा। अंतरिक्ष में ऊपर और नीचे की सामान्य दिशा नहीं होती। इसलिए मधुमक्खियों के सामने छत्ता बनाने की बड़ी चुनौती थी।
नासा ने उन्हें खास बाड़े में रखा, ताकि वैज्ञानिक उनके चलने, उड़ने, छत्ता बनाने और कॉलोनी के दूसरे कामों को करीब से देख सकें।
माइक्रोग्रैविटी
माइक्रोग्रैविटी में मधुमक्खियों ने बनाया छत्ता
अंतरिक्ष में मधुमक्खियों ने छत्ता बनाना शुरू किया, लेकिन शुरुआत में उनकी संरचना धरती के छत्ते जैसी सीधी नहीं थी।
वे अलग-अलग कोणों पर मोम की संरचना बनाने लगीं। धीरे-धीरे मधुमक्खियों ने नए माहौल के साथ खुद को ढाल लिया और आखिरकार करीब 31 वर्ग इंच का छत्ता तैयार किया।
इससे वैज्ञानिकों को पता चला कि गुरुत्वाकर्षण की कमी के बावजूद मधुमक्खियां मिलकर अपना जरूरी काम कर सकती हैं और एक उपयोगी ढांचा तैयार कर सकती हैं।
मधुमक्खी
रानी मधुमक्खी ने दिए 35 अंडे
इस प्रयोग में मधुमक्खियों ने छत्ता बनाने के अलावा कॉलोनी के कई सामान्य काम भी जारी रखे।
उन्होंने मरी हुई मधुमक्खियों को बाहर हटाया और आपस में मिलकर काम किया। मिशन के दौरान रानी मधुमक्खी ने 35 अंडे भी दिए। हालांकि, धरती पर लौटने के बाद इनमें से कोई अंडा नहीं फूटा।
इसका कारण स्पष्ट नहीं हो सका। इसलिए वैज्ञानिक यह साबित नहीं कर सके कि मधुमक्खियां अंतरिक्ष में पूरी तरह सफलतापूर्वक प्रजनन कर सकती हैं।
भविष्य
भविष्य की अंतरिक्ष खेती में काम आ सकती हैं
मधुमक्खियां सिर्फ शहद बनाने के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं हैं।
वे कई फसलों के परागण में बड़ी भूमिका निभाती हैं। इसलिए भविष्य में अगर इंसान चांद या अंतरिक्ष में लंबे समय तक खेती करते हैं, तो मधुमक्खियां उपयोगी साबित हो सकती हैं।
इस प्रयोग ने यह भी दिखाया कि उनकी कॉलोनी टीमवर्क पर काफी निर्भर रहती है। हालांकि, अंतरिक्ष में मधुमक्खियों ने खुद को काफी हद तक ढाला, लेकिन उनका छत्ता धरती जैसा पूरी तरह व्यवस्थित नहीं बन पाया।