नासा के आर्टेमिस II मिशन का रॉकेट और कैप्सूल किसने बनाया?
क्या है खबर?
अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने आज आर्टेमिस II मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। इस मिशन के जरिए करीब 50 साल बाद इंसानों को फिर चांद की ओर भेजा गया है। फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट के जरिए उड़ान भरी गई। यह मिशन भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए बेहद अहम माना जा रहा, जिसमें नई तकनीकों और सिस्टम की जांच की जाएगी ताकि आगे इंसानों को चांद की सतह पर उतारा जा सके।
रॉकेट
स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट किसने बनाया?
इस मिशन में इस्तेमाल हुआ SLS रॉकेट कई बड़ी कंपनियों के सहयोग से तैयार किया गया है। इसका मुख्य हिस्सा अमेरिकी कंपनी बोइंग ने बनाया है, जिसमें स्पेस शटल के पुराने इंजन भी इस्तेमाल किए गए हैं। वहीं, इसके सॉलिड रॉकेट बूस्टर नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन ने तैयार किए हैं, जो लॉन्च के समय सबसे ज्यादा ताकत देते हैं और कुछ ही मिनट में अलग हो जाते हैं, जिससे रॉकेट की गति और संतुलन दोनों बेहतर बनाए रखते हैं।
ऊपरी हिस्सा
रॉकेट के ऊपरी हिस्से की खास भूमिका
रॉकेट का ऊपरी हिस्सा, जिसे इंटरिम क्रायोजेनिक प्रोपल्शन सिस्टम कहा जाता है, यूनाइटेड लॉन्च एलायंस (ULA) ने बनाया है। यह हिस्सा रॉकेट को अंतरिक्ष में अंतिम गति देने का काम करता है। इसमें तरल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का इस्तेमाल होता है, जो पहले अपोलो मिशनों में भी किया गया था। यह सिस्टम रॉकेट को सही कक्षा में पहुंचाने में बेहद अहम भूमिका निभाता है और मिशन की सफलता सुनिश्चित करने में बहुत महत्वपूर्ण योगदान देता है।
ओरियन कैप्सूल
ओरियन कैप्सूल और सर्विस मॉड्यूल किसने बनाया?
इस मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाने वाला ओरियन कैप्सूल लॉकहीड मार्टिन ने तैयार किया है। यही वह हिस्सा है जहां क्रू रहता है और अपने सभी जरूरी काम करता है। इसके साथ जुड़ा सर्विस मॉड्यूल यूरोप की अंतरिक्ष एजेंसी यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के सहयोग से बना है, जिसे एयरबस ने तैयार किया है। इसमें पावर, प्रोपल्शन और जीवन रक्षक सिस्टम मौजूद हैं, जो पूरे मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित और सक्रिय बनाए रखते हैं।
भविष्य
भविष्य के मिशनों में निजी कंपनियों की भूमिका
इस मिशन में स्पेस-X और ब्लू ओरिजन की सीधी भूमिका नहीं है, लेकिन आने वाले मिशनों में इनकी अहम भागीदारी होगी। ये कंपनियां ऐसे लैंडर बना रही हैं, जो अंतरिक्ष यात्रियों को चांद की सतह तक पहुंचाएंगे। आर्टेमिस III और आगे के मिशनों में इन तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे इंसानों की चांद पर वापसी और लंबे समय तक वहां रहने की योजना को मजबूत और ज्यादा सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाया जा सकेगा।