कौन हैं पवन चंदना और नागा भरत, जिन्होंने निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में रचा इतिहास?
क्या है खबर?
स्काईरूट एयरोस्पेस ने शनिवार (18 जुलाई) को श्रीहरिकोटा स्थित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से भारत का पहला निजी निर्मित कक्षीय रॉकेट विक्रम-1 लॉन्च कर इतिहास रच दिया। यह निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में भारतीय कंपनी की बड़ी छलांग है। इस उपलब्धि के पीछे कंपनी के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पवन कुमार चंदना और उनके दोस्त और नागा भरत डाका की मेहनत है। आइए जानते हैं चंदना और डाका इस मुकाम तक कैसे पहुंचे।
पढ़ाई
गणित विषय में कमजोर थे चंदना
पवन कुमार चंदना का जन्म 1991 में तेलंगाना के हैदराबाद में हुआ था। शुरुआत में वे गणित में इतने कमजोर थे कि स्कूल में मुश्किल से पास हुए थे।
उनके पिता ने उन्हें निराश नहीं होने दिया। उन्हें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) प्रवेश परीक्षा के लिए कोचिंग में दाखिला दिलाया।
चंदना ने अपने पहले ही प्रयास में परीक्षा उत्तीर्ण की और 2007 में IIT खड़गपुर में दाखिला लिया, जहां उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक-एमटेक की दोहरी डिग्री पूरी की।
करियर
ISRO में शुरू किया था करियर
2012 में चंदना ने कॉलेज से निकलते ही सीधे ISRO में नौकरी शुरू कर दी। वेतन मामूली था, लेकिन उन्हें काम इतना पसंद था कि उन्होंने अपना पूरा करियर वहीं बिताने का सपना देखा।
तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में लगभग 6 वर्षों तक उन्होंने भारत के सबसे भारी प्रक्षेपण यान GSLV Mk-III, GSLV Mk-II के लिए S-200 सॉलिड बूस्टर पर काम किया।
चंदना ने 2018 में ISRO छोड़ दिया और जून, 2018 में स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना की।
सह संस्थापक
दाेस्त के साथ मिलकर शुरू की कंपनी
डाका स्काईरूट एयरोस्पेस के सह संस्थापक और मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) हैं।
कंपनी शुरू करने से पहले उन्होंने ISRO में फ्लाइट कंप्यूटर इंजीनियर के तौर पर काम किया, जहां उन्होंने भारतीय लॉन्च व्हीकल्स के लिए कई एवियोनिक्स मॉड्यूल डिजाइन और डेवलप किए।
IIT मद्रास के पूर्व छात्र डाका के पास माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स और VLSI डिजाइन में मास्टर डिग्री और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बैचलर डिग्री भी है।
उन्हें एवियोनिक्स, सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी और फील्ड-प्रोग्रामेबल गेट ऐरे (FPGA) सिस्टम का काफी अनुभव है।
प्रगति
ऐसे की कंपनी ने प्रगति
स्थापना के 2 साल बाद जुलाई, 2020 में कंपनी ने रमन-1 का निर्माण और परीक्षण किया। जब भारत ने 2021 में अपने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोला तो स्काईरूट सबसे पहले आगे आई।
उसने ISRO के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। 18 नवंबर, 2022 को कंपनी ने विक्रम-S लॉन्च किया, जो भारत का पहला निजी तौर पर निर्मित सबऑर्बिटल रॉकेट था।
इसके पास देश की सबसे बड़ी रॉकेट निर्माण यूनिट है।