स्काईरूट एयरोस्पेस ने विक्रम-1 में कौनसी तकनीकों का किया है इस्तेमाल?
क्या है खबर?
हैदराबाद की स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस ने अपने पहले ही प्रयास में विक्रम-1 रॉकेट लॉन्च कर इतिहास रच दिया है। यह ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट है, जिसे 3D-प्रिंटेड इंजन, कार्बन कम्पोजिट स्ट्रक्चर और देश में बने प्रोपल्शन सिस्टम जैसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी से बनाया गया है। छोटे सैटेलाइट्स के लिए खास तौर पर बनाए गए लॉन्च व्हीकल 'विक्रम-1' से भारत की कमर्शियल स्पेस महत्वाकांक्षाओं में एक नया अध्याय शुरू होगा। आइए जानते हैं इस रॉकेट में क्या खास तकनीक है।
हल्की सामग्री
हल्की सामग्री से बनाया गया रॉकेट
विक्रम-1 पारंपरिक लॉन्च व्हीकल से अलग है क्योंकि इसे खास तौर पर छोटे सैटेलाइट के बढ़ते बाजार के लिए डिजाइन किया गया है।
यह रॉकेट सैटेलाइट को लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में पहुंचाने के लिए सॉलिड और लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम, हल्के मटीरियल और एडवांस्ड एवियोनिक्स का इस्तेमाल करता है।
इसमें कम वजन के लिए कार्बन कम्पोजिट मटीरियल का इस्तेमाल किया है, जिससे यह ज्यादा पेलोड ले जा सकता है और साथ ही इसकी फ्यूल क्षमता भी बेहतर होती है।
3D इंजन
3D-प्रिंटेड पार्ट्स से बनाया इंजन
रॉकेट में एडवांस्ड प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें इसके इंजन में 3D-प्रिंटेड पार्ट्स का इस्तेमाल शामिल है।
यह इंजीनियर्स को कम पार्ट्स के साथ इंजन के जटिल पार्ट्स बनाने की सुविधा देती है। इससे प्रोडक्शन का समय कम, डिजाइन में ज्यादा लचीलापन मिलता और लागत कम आती है।
स्काईरूट ने अपने खुद के प्रोपल्शन सिस्टम विकसित किए हैं, जिनमें रमन लिक्विड इंजन भी शामिल है। यह तकनीक हाई-परफॉर्मेंस इंजन बनाने में मदद करती है।
4-स्टेज
सटीकता के लिए डिजाइन किए 4-स्टेज
विक्रम-1 एक 4-स्टेज वाला रॉकेट है, जिसे सैटेलाइट्स को उनकी तय कक्षा (ऑर्बिट) में सही-सही पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया है।
इसके शुरुआती 3 स्टेज में सॉलिड-फ्यूल प्रोपल्शन का इस्तेमाल होता है, जो स्काईरूट के कलाम सीरीज के इंजन से चलता है।
आखिरी स्टेज में दोबारा स्टार्ट हो सकने वाले रमन लिक्विड इंजन का इस्तेमाल होता है, जो आखिरी चरण में बेहतर कंट्रोल देता है। इस कॉम्बिनेशन की वजह से रॉकेट सैटेलाइट को सटीकता से तैनात कर पाता है।
डिजाइन
छोटे सैटेलाइट के लिए लॉन्च के लिए डिजाइन
छोटे सैटेलाइट लॉन्च करने की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ी है, क्योंकि कंपनियां, रिसर्च संस्थान और सरकारें अंतरिक्ष तक जाने के लिए खास लॉन्च सर्विस की तलाश में हैं।
विक्रम-1 को इन्हीं जरूरतों को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह सिर्फ शेयर्ड मिशन पर निर्भर रहने के बजाय खास लॉन्च के मौके देता है।
इससे सैटेलाइट ऑपरेटर्स को इंतजार का समय कम करने और ज्यादा आसानी से मिशन की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।