व्हाट्सऐप ने भारत में सिम-बाइंडिंग की टेस्टिंग की शुरू, यूजर्स के लिए क्या है इसका मतलब?
क्या है खबर?
व्हाट्सऐप ने भारत में सिम-बाइंडिंग फीचर की जांच शुरू कर दी है। यह कदम सरकारी नियमों को पूरा करने के लिए उठाया गया है, जो नवंबर, 2025 में लागू हुए थे और जिनकी अंतिम तारीख 31 दिसंबर, 2026 तय की गई है। कुछ लोगों को ऐप के अंदर सूचना मिली है कि उनके सिम की पुष्टि की जाएगी और यह प्रक्रिया समय-समय पर दोहराई भी जा सकती है। अभी यह सुविधा टेस्टिंग के चरण में है।
सिम-बाइंडिंग
सिम-बाइंडिंग क्या है और कैसे काम करेगा?
सिम-बाइंडिंग एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें ऐप यह देखता है कि जिस मोबाइल नंबर से अकाउंट बना है, वही सिम फोन में लगा हुआ है या नहीं। यह OTP से आगे की सुरक्षा देता है और यूजर की पहचान को और मजबूत बनाता है। व्हाट्सऐप समय-समय पर यह जांच कर सकता है कि अकाउंट सही सिम के साथ ही चल रहा है। इससे गलत तरीके से किसी और के खाते में घुसने का खतरा कम हो जाता है।
उद्देश्य
सरकार के नियम और इसका उद्देश्य
यह कदम दूरसंचार विभाग (DoT) के निर्देशों के अनुसार उठाया जा रहा है। सरकार चाहती है कि व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और सिग्नल जैसे ऐप्स इस सुविधा को अपनाएं ताकि ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोका जा सके और यूज़र्स की सुरक्षा बढ़ाई जा सके। अधिकारियों का मानना है कि इससे फर्जी सिम और OTP चोरी से होने वाले अपराध कम होंगे। तकनीकी दिक्कतों के कारण इसकी समयसीमा को आगे बढ़ाया गया है और कंपनियों को अतिरिक्त समय दिया गया है।
असर
यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा?
अभी लोगों के लिए तुरंत कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, क्योंकि टेस्टिंग के बाद यह और धीरे-धीरे लागू की जाएगी। पूरी तरह लागू होने के बाद लोगों को ध्यान रखना होगा कि उनका सिम उनके मुख्य फोन में चालू रहे और सही तरीके से काम करता रहे। इससे बार-बार सिम बदलने वाले या दूसरे फोन पर इस्तेमाल करने वालों को थोड़ी दिक्कत हो सकती है। हालांकि, इसका मकसद अकाउंट को ज्यादा सुरक्षित बनाना और धोखाधड़ी को कम करना है।