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आर्टेमिस II मिशन की धरती पर वापसी में गुरुत्वाकर्षण की क्या भूमिका होगी?
आर्टेमिस II मिशन की धरती पर वापसी में गुरुत्वाकर्षण अहम भूमिका निभाएगा

आर्टेमिस II मिशन की धरती पर वापसी में गुरुत्वाकर्षण की क्या भूमिका होगी?

Apr 08, 2026
02:17 pm

क्या है खबर?

चांद के पास ऐतिहासिक उड़ान पूरी करने के बाद नासा का आर्टेमिस II मिशन अब धरती पर सुरक्षित वापसी में लगा हुआ है। यह सफर आसान नहीं है और इसमें कई जरूरी कदम शामिल हैं। अंतरिक्ष यात्री रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन इस मिशन का हिस्सा हैं। अब पूरा ध्यान अंतरिक्ष यान को सही रास्ते से वापस लाने, सिस्टम जांच करने और सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करने पर है।

गुरुत्वाकर्षण

गुरुत्वाकर्षण की क्या भूमिका होगी?

इस मिशन में गुरुत्वाकर्षण की बहुत बड़ी भूमिका है। ओरियन अंतरिक्ष यान पहले चांद के गुरुत्वाकर्षण से बाहर निकला और अब धीरे-धीरे धरती के खिंचाव में आ रहा है। इस प्रक्रिया को इस तरह डिजाइन किया गया है कि ईंधन कम खर्च हो और रास्ता सही बना रहे। जैसे अपोलो मिशन में हुआ था, वैसे ही यहां भी प्राकृतिक ताकतों का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि यात्रा सुरक्षित और संतुलित तरीके से पूरी हो सके।

स्लिंगशॉट

'स्लिंगशॉट' असर से मिलेगी गति और दिशा

गुरुत्वाकर्षण के इस असर को 'स्लिंगशॉट' कहा जाता है, जो अंतरिक्ष यान को सही दिशा में आगे बढ़ाता है। इससे ओरियन को धरती की ओर लौटने में अतिरिक्त मदद मिलती है और ईंधन की बचत होती है। 8 अप्रैल को छोटे-छोटे थ्रस्टर बर्न के जरिए रास्ता और गति को ठीक किया गया। इसके साथ ही, अंतरिक्ष यात्री जीवन समर्थन सिस्टम, संचार और शरीर पर पड़ने वाले असर से जुड़े उपकरणों की जांच भी कर रहे हैं।

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वापसी

तेज रफ्तार वापसी और सुरक्षित लैंडिंग की तैयारी

10 अप्रैल को अंतरिक्ष यान लगभग 25,000 मील (लगभग 40,000 किलोमीटर) प्रति घंटे की रफ्तार से धरती के वातावरण में प्रवेश करेगा। इस दौरान हीट शील्ड तेज गर्मी को झेलेगा और पैराशूट की मदद से स्पीड कम की जाएगी। इसके बाद प्रशांत महासागर में लैंडिंग होगी, जहां अमेरिकी नौसेना की टीमें क्रू को सुरक्षित बाहर निकालेंगी। इसके बाद वैज्ञानिक पूरे मिशन के डाटा का विश्लेषण करेंगे, जिससे भविष्य के मिशनों को और बेहतर बनाया जा सके।

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