डिजिटल अरेस्ट ठगी से निपटने के लिए सरकार ने क्या बनाई है योजना?
क्या है खबर?
देश में बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट स्कैम को लेकर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में नई रिपोर्ट पेश की है। इसमें साफ कहा गया है कि अब साइबर ठगी रोकने के लिए कई विभाग मिलकर एक साथ काम करेंगे। सरकार चाहती है कि पूरे देश में एक जैसे नियम लागू हों ताकि ठगों पर तेजी से कार्रवाई हो सके। इस कदम का मकसद लोगों की सुरक्षा बढ़ाना और ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों को जल्दी रोकना है।
DoT
DoT की भूमिका: फर्जी सिम पर सख्ती
रिपोर्ट में दूरसंचार विभाग (DoT) की अहम भूमिका बताई गई है। फर्जी सिम कार्ड के इस्तेमाल को रोकने के लिए बायोमेट्रिक जांच को जरूरी बनाने पर जोर दिया गया है। टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे हर सिम की सही पहचान करें और संदिग्ध नंबर को तुरंत बंद करें। साथ ही एजेंसियों के साथ डेटा साझा करने की व्यवस्था मजबूत की जाएगी, ताकि साइबर अपराधियों तक जल्दी पहुंचा जा सके।
MeitY
MeitY की निगरानी: डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कंट्रोल
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को डिजिटल प्लेटफॉर्म की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। व्हाट्सऐप जैसे ऐप को संदिग्ध कॉल और मैसेज पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। फर्जी अकाउंट और डिवाइस को पहचानकर ब्लॉक करने की व्यवस्था मजबूत की जाएगी। इसके साथ ही, डाटा को सुरक्षित रखने और जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसियों को देने का नियम लागू होगा, जिससे ठगी के मामलों को रोका जा सके।
कानून
बैंकिंग और कानून में भी होंगे बड़े बदलाव
रिपोर्ट में बैंकिंग सिस्टम को भी मजबूत करने की बात कही गई है। संदिग्ध खातों पर तुरंत अस्थायी रोक लगाने का सुझाव दिया गया है, ताकि पैसों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। साथ ही पूरे देश में एक समान नियम लागू करने और कानून को सख्त बनाने की जरूरत बताई गई है। इससे साइबर अपराध के मामलों में तेजी से कार्रवाई होगी और लोगों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा।