Loading...
करीब 8 साल की यात्रा के बाद बुध पहुंचेगा बेपीकोलंबो, जानें क्या है मिशन
करीब 8 साल की यात्रा के बाद बुध पहुंचेगा बेपीकोलंबो

करीब 8 साल की यात्रा के बाद बुध पहुंचेगा बेपीकोलंबो, जानें क्या है मिशन

Sep 03, 2026
07:19 pm

क्या है खबर?

सूरज के पास मौजूद बुध ग्रह के कई रहस्यों का पता लगाने वाला बेपीकोलंबो मिशन अब अहम पड़ाव में पहुंच गया है। यूरोप और जापान की अंतरिक्ष एजेंसियों का यह मिशन करीब आठ साल की यात्रा के बाद बुध के पास पहुंच रहा है। मिशन का मकसद ग्रह की सतह, अंदरूनी बनावट, चुंबकीय क्षेत्र और वातावरण को समझना है। वैज्ञानिक इससे यह जानने की कोशिश करेंगे कि बुध कैसे बना और उसमें क्या बदलाव हुए।

मिशन

क्या है बेपीकोलंबो मिशन?

बेपीकोलंबो मिशन यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) का संयुक्त अभियान है।

इसे अक्टूबर, 2018 में फ्रेंच गुयाना के कौरू के पास यूरोप के स्पेसपोर्ट से एरियन-5 रॉकेट के जरिए लॉन्च किया गया था। मिशन का नाम इतालवी वैज्ञानिक ग्यूसेप बेपी कोलंबो के नाम पर रखा गया है।

अब तक यह 10 अरब किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय कर चुका है। इसका लक्ष्य बुध की कक्षा में पहुंचकर अध्ययन करना है।

यात्रा

सीधे बुध तक क्यों नहीं पहुंचा मिशन?

बुध तक पहुंचने के लिए बेपीकोलंबो ने सीधा रास्ता नहीं अपनाया है।

अंतरिक्ष यान ने इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन के साथ ग्रहों की गुरुत्वाकर्षण शक्ति का इस्तेमाल किया। पृथ्वी, शुक्र और बुध के कुल नौ फ्लाईबाई इसकी गति और रास्ता सही करने में मदद करेंगे।

बुध सूरज के बहुत पास है और उसकी कक्षा में जाने के लिए अंतरिक्ष यान को ऊर्जा की जरूरत पड़ती है। इस जटिल प्रक्रिया के कारण मिशन को पहुंचने में कई साल लगे।

ADVERTISEMENT

जांच

दो ऑर्बिटर मिलकर करेंगे बुध की जांच

बुध के पास पहुंचने के बाद मिशन का ट्रांसफर मॉड्यूल अलग होगा और दो वैज्ञानिक ऑर्बिटर अपने-अपने काम संभालेंगे।

ESA का मरकरी प्लैनेटरी ऑर्बिटर ग्रह की सतह और अंदरूनी हिस्से का अध्ययन करेगा, जबकि जापान का मरकरी मैग्नेटोस्फेरिक ऑर्बिटर बुध के आसपास के अंतरिक्ष और चुंबकीय वातावरण को देखेगा।

दोनों ऑर्बिटर अलग-अलग उपकरणों से ग्रह की तस्वीरें, सतह की जानकारी और उसके आसपास मौजूद बेहद पतले गैस वाले वातावरण का अध्ययन करेंगे।

ADVERTISEMENT

वैज्ञानिक काम

अप्रैल से शुरू होगा वैज्ञानिक काम

मिशन के दोनों ऑर्बिटर 21 नवंबर को बुध की कक्षा में प्रवेश करेंगे।

इसके बाद 9 और 10 दिसंबर के बीच दोनों एक-दूसरे से अलग होंगे। यूरोपीय ऑर्बिटर 16 दिसंबर को अपनी कक्षा में पहुंचेगा, जबकि जापानी ऑर्बिटर 10 मार्च को अपनी तय कक्षा में जाएगा।

मिशन के वैज्ञानिक संचालन अप्रैल, 2027 में आधिकारिक तौर पर शुरू होंगे। इसके बाद वैज्ञानिक बुध की सतह, चुंबकीय क्षेत्र और वातावरण से जुड़ी नई जानकारी जुटाना शुरू करेंगे।

रहस्य

बुध के कई रहस्यों से उठेगा पर्दा

वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि बेपीकोलंबो बुध के सवालों के जवाब देगा और रहस्य सुलझाएगा।

इनमें ग्रह पर दिखने वाले खोखले गड्ढे और बुध का घना होना शामिल है। माना जाता है कि अरबों साल पहले किसी बड़े ग्रह से टक्कर के कारण बुध की बाहरी परत का कुछ हिस्सा हट गया होगा।

इस अंतरिक्ष मिशन से पता चल सकता है कि यह अनुमान सही है या बुध के बनने की कहानी कुछ अलग है।

ADVERTISEMENT