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क्या है स्पेस-X का स्टारफॉल कैप्सूल, जिसे पहली बार अंतरिक्ष में भेजा गया?
यह मिशन आज अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित केप कैनावेरल स्पेस फोर्स स्टेशन से लॉन्च किया गया

क्या है स्पेस-X का स्टारफॉल कैप्सूल, जिसे पहली बार अंतरिक्ष में भेजा गया?

Jun 23, 2026
04:56 pm

क्या है खबर?

एलन मस्क की अंतरिक्ष कंपनी स्पेस-X ने आज (23 जून) अपनी नई अंतरिक्ष तकनीक स्टारफॉल कैप्सूल को पहली बार अंतरिक्ष में भेज दिया है। यह मिशन आज अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित केप कैनावेरल स्पेस फोर्स स्टेशन से लॉन्च किया गया। भारतीय समय के अनुसार शाम करीब 4:20 बजे फाल्कन 9 रॉकेट से कैप्सूल को अंतरिक्ष में भेजा गया। इस मिशन के जरिए कंपनी पहली बार अपने नए पुन: उपयोग योग्य कार्गो कैप्सूल का परीक्षण कर रही है।

खासियत

क्या है इसकी खासियत?

स्टारफॉल एक कार्गो कैप्सूल है, जिसे पृथ्वी की निचली कक्षा और उससे आगे तक वैज्ञानिक उपकरण और अन्य पेलोड पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है। इसकी खास बात यह है कि यह अंतरिक्ष में कुछ समय बिताने के बाद सामान को वापस धरती पर भी ला सकता है। इसका उपयोग दवा अनुसंधान, ऑर्बिटल मैन्युफैक्चरिंग और वैज्ञानिक प्रयोगों से जुड़े उत्पादों को सुरक्षित तरीके से वापस लाने में किया जा सकता है।

आकार

आकार और क्षमता में पहले के कैप्सूल से काफी बड़ा

स्पेस-X का स्टारफॉल कैप्सूल आकार और क्षमता के मामले में पहले इस्तेमाल किए गए कई कैप्सूल से काफी बड़ा है। इसकी चौड़ाई करीब 10 फुट यानी 3.1 मीटर और ऊंचाई लगभग 2.5 फुट यानी 0.75 मीटर है। यह एक बार में करीब 2,200 पाउंड यानी 1,000 किलोग्राम तक का पेलोड ले जा सकता है। तुलना करें तो पहले इस्तेमाल किए गए कुछ कैप्सूल केवल 300 किलोग्राम तक का सामान ले जाने में सक्षम थे।

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वापसी

खास डिजाइन की मदद से सुरक्षित करेगा वापसी

स्टारफॉल को पृथ्वी के वातावरण में दोबारा प्रवेश के दौरान सुरक्षित रहने के लिए विशेष डिजाइन दिया गया है। इसमें कार्बन फाइबर हीट शील्ड लगी है, जो अत्यधिक तापमान से इसकी सुरक्षा करेगी। कैप्सूल में दिशा नियंत्रित करने के लिए नाइट्रोजन गैस आधारित प्रणाली का इस्तेमाल किया गया है। इसमें कोई खतरनाक तरल ईंधन नहीं है। पृथ्वी पर लौटते समय यह पैराशूट की मदद से प्रशांत महासागर में उतरने के लिए तैयार किया गया है।

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मिशन

लंबे मिशन के लिए भी तैयार

स्पेस-X के अनुसार, स्टारफॉल को ऐसे मिशनों के लिए भी तैयार किया गया है, जिनमें उसे लंबे समय तक पृथ्वी की निचली कक्षा में रहना पड़े। हालांकि, इसमें अपना प्रोपल्शन सिस्टम नहीं है, इसलिए यह खुद से कक्षा से बाहर नहीं निकल सकता। मिशन पूरा होने पर इसके अमेरिका के पश्चिमी तट से करीब 1,300 किलोमीटर दूर प्रशांत महासागर में उतरा गया। इससे भविष्य के बड़े अंतरिक्ष मिशन में काफी लाभ मिलेगा।

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