ई-मुद्रा सर्टिफिकेट क्या है, इसकी प्राइवेट कीज लीक होने से इंटरनेट पर कैसे खतरा?
क्या है खबर?
भारत की डिजिटल सुरक्षा से जुड़ी कंपनी ई-मुद्रा की एक सेवा में सुरक्षा खामी सामने आने के बाद इंटरनेट पर वेबसाइटों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी की वेब सर्टिफिकेट सेवा से जुड़ी 8 निजी कीज उजागर हुई हैं। इस मामले में भारतीय साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने चेतावनी जारी की है। इसके अलावा, कई प्रमुख ब्राउजर कंपनियों ने भी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अपने सिस्टम में जरूरी बदलाव किए हैं।
कंपनी
क्या है ई-मुद्रा?
ई-मुद्रा बेंगलुरु की एक कंपनी है, जो डिजिटल पहचान, इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर और इंटरनेट सुरक्षा से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराती है।
कंपनी डिजिटल सर्टिफिकेट भी जारी करती है, जिनका इस्तेमाल वेबसाइटों की पहचान की पुष्टि और सुरक्षित इंटरनेट संपर्क बनाने में होता है। सरकारी संस्थानों और सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ बैंकों की वेबसाइटें भी ऐसी सेवाओं पर निर्भर हैं।
इसलिए कंपनी की सुरक्षा व्यवस्था में सामने आई समस्या को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सर्टिफिकेट
क्या होते हैं डिजिटल सर्टिफिकेट?
डिजिटल सर्टिफिकेट इंटरनेट पर किसी वेबसाइट की पहचान साबित करने वाले इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज होते हैं।
इनकी मदद से ब्राउजर जांचता है कि वेबसाइट की पहचान सही है और उससे जुड़ना सुरक्षित है या नहीं। इन्हें जारी करने वाली संस्था निजी कीज से सर्टिफिकेट पर डिजिटल हस्ताक्षर करती है।
निजी कीज को गोपनीय रखना जरूरी होता है, जबकि सार्वजनिक की साझा की जा सकती है। यही व्यवस्था वेबसाइटों की पहचान और इंटरनेट पर भरोसा बनाए रखने में मदद करती है।
खतरा
निजी कीज सामने आने से क्या खतरा हो सकता है?
अगर सर्टिफिकेट जारी करने में इस्तेमाल होने वाली निजी कीज़ का गलत इस्तेमाल होता है, तो हमलावर फर्जी सर्टिफिकेट बनाकर किसी वेबसाइट की नकल करने की कोशिश कर सकते हैं।
कुछ परिस्थितियों में इससे मैन-इन-द-मिडिल हमला भी संभव है। इसमें हमलावर यूजर और वेबसाइट के बीच होने वाले संपर्क को रोकने या उसमें बदलाव करने की कोशिश करता है।
ऐसे हमलों का मकसद लॉगिन जानकारी, पासवर्ड या दूसरी निजी जानकारियां हासिल करना हो सकता है।
अन्य
यूजर्स को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों को अपने मोबाइल, कंप्यूटर और ब्राउजर को अपडेट रखना चाहिए।
किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें और बैंकिंग या दूसरी निजी जानकारी भरने से पहले वेबसाइट का पता अच्छी तरह जांच लें। वहीं, वेबसाइट संचालकों और संस्थानों को CERT-In की एडवाइजरी पर ध्यान देते हुए जरूरी सुरक्षा अपडेट लागू करने चाहिए।
ब्राउजर कंपनियों की ओर से जारी अपडेट भी समय पर इंस्टॉल करना जरूरी है, ताकि सुरक्षा जोखिम कम करने में मदद मिल सके।