LOADING...
चार्जबैक क्या होता है? साइबर ठगी में गंवाया पैसा दिला सकता है वापस
देश में साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं

चार्जबैक क्या होता है? साइबर ठगी में गंवाया पैसा दिला सकता है वापस

May 05, 2026
08:21 am

क्या है खबर?

देश में साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई बार यह नुकसान स्थायी नहीं होता, क्योंकि बैंक ग्राहकों को चार्जबैक जैसी सुविधा देते हैं। इसके जरिए गलत या धोखाधड़ी वाले लेन-देन पर शिकायत दर्ज की जा सकती है। अगर समय पर सही कदम उठाए जाएं और तय प्रक्रिया अपनाई जाए, तो खोए हुए पैसे वापस मिलने की संभावना काफी बेहतर हो सकती है।

चार्जबैक

चार्जबैक क्या होता है?

चार्जबैक एक बैंकिंग प्रक्रिया है, जिसमें ग्राहक के बैंक द्वारा गलत ट्रांजैक्शन को रद्द कराने के लिए दूसरे बैंक से बात की जाती है। यह सुविधा तब मिलती है जब बिना अनुमति पैसा कट जाए, भुगतान के बाद सामान न मिले या मिला सामान सही न हो। ऐसे मामलों में ग्राहक बैंक को जानकारी देकर अपने पैसे वापस पाने की कोशिश कर सकता है और अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर सकता है।

जरूरी कदम

रिफंड पाने के लिए जरूरी कदम क्या हैं?

अगर आपको कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखता है, तो तुरंत बैंक को इसकी जानकारी देना जरूरी है। आप कॉल, मोबाइल ऐप या बैंक जाकर शिकायत दर्ज कर सकते हैं और एक शिकायत नंबर लेना चाहिए। इसके बाद एक फॉर्म भरना होता है, जिसमें ट्रांजैक्शन की पूरी जानकारी दी जाती है। इसके साथ ही, जरूरी दस्तावेज जैसे स्क्रीनशॉट, रसीद और ईमेल भी जमा करने होते हैं, ताकि जांच सही तरीके से हो सके।

Advertisement

तरीके

समय सीमा और शिकायत दर्ज कराने के सही तरीके

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार, किसी भी गलत ट्रांजैक्शन की शिकायत 120 दिनों के भीतर करनी होती है। अगर देरी होती है तो पैसे वापस मिलने की संभावना घट जाती है। इसके अलावा, साइबर ठगी के मामलों की शिकायत 1930 नंबर या cybercrime.gov.in पोर्टल पर भी करनी चाहिए। समय पर रिपोर्ट करने से आगे के नुकसान को रोका जा सकता है और रिकवरी की प्रक्रिया तेज हो जाती है।

Advertisement