कॉइनबेस में डाटा चोरी की खबरों पर कंपनी ने क्या कहा? जानिए पूरा मामला
क्या है खबर?
क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज कॉइनबेस ने अपने ग्राहकों का डाटा चोरी होने की खबरों को खारिज किया है। कंपनी के अनुसार, उसके लिए आंकड़ों का विश्लेषण करने वाली कंपनी एम्प्लिट्यूड में सुरक्षा से जुड़ी एक घटना हुई थी। इससे कुछ ग्राहकों की संपर्क जानकारी प्रभावित हुई हो सकती है। हालांकि, कॉइनबेस का कहना है कि उसके अपने सिस्टम में सेंधमारी के कोई सबूत नहीं मिले हैं। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्राहकों की रकम सुरक्षित है।
दावा
70,000 से अधिक यूजर्स की जानकारी तक पहुंचने का दावा
ब्लॉकचेन सुरक्षा कंपनी स्लोमिस्ट के शोधकर्ता 23pds ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि हैकर्स ने कॉइनबेस के 70,000 से ज्यादा यूजर्स की संपर्क जानकारी हासिल कर ली।
इसके बाद कॉइनबेस ने अपनी सफाई जारी की। कंपनी के मुताबिक, मामला उसके सिस्टम में सेंधमारी का नहीं, बल्कि एम्प्लिट्यूड में हुई सुरक्षा घटना का है।
हालांकि, कंपनी ने यह नहीं बताया कि इस घटना से उसके कितने ग्राहकों की जानकारी प्रभावित हुई है।
ट्विटर पोस्ट
यहां देखें पोस्ट
Coinbase has not had a data breach.
— Coinbase Support (@CoinbaseSupport) October 28, 2026
Amplitude, an analytics vendor, experienced a security incident which impacted a small subset of Coinbase customer contact data, among other Amplitude customers.
We’ve found no evidence of unauthorized access to Coinbase systems, and…
एक्सचेंज
प्रभावित ग्राहकों को जानकारी दे रहा है एक्सचेंज
कॉइनबेस ने कहा कि इस घटना से ग्राहकों के पैसों या क्रिप्टोकरेंसी पर कोई असर नहीं पड़ा है।
कंपनी ने बताया कि जिन यूजर्स की संपर्क जानकारी प्रभावित हुई है, उन्हें इसकी सूचना दी जा रही है। इसके अलावा, वह संबंधित नियामक एजेंसियों के साथ भी संपर्क में है।
हालांकि, कंपनी ने सुरक्षा घटना की तारीख, प्रभावित लोगों की संख्या और इसके पीछे जिम्मेदार लोगों के बारे में जानकारी साझा नहीं की है।
मामला
2025 में भी सामने आया था डाटा चोरी का मामला
कॉइनबेस के दुनियाभर में 10 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं।
कंपनी ने जून में भारत में रुपये से लेनदेन की सुविधा के साथ अपनी सेवाएं दोबारा शुरू की थीं। इससे पहले मई, 2025 में भी कंपनी से जुड़ा डाटा चोरी का मामला सामने आया था।
उस समय अपराधियों ने विदेशी सहायता कर्मचारियों को रिश्वत देकर ग्राहकों के नाम, फोन नंबर, सरकारी पहचान पत्रों की तस्वीरें और लेनदेन का रिकॉर्ड हासिल किया था। उस घटना से 69,000 ग्राहक प्रभावित हुए थे।