AI से लेकर मेडिकल रिसर्च तक, अंतरिक्ष में क्या-क्या करेंगे अनिल मेनन?
क्या है खबर?
भारतीय मूल के नासा के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन आज (14 जुलाई) रात 08:17 बजे रोसकॉसमॉस के सोयुज MS-29 अंतरिक्ष यान से अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) के लिए रवाना होंगे। वह रूसी अंतरिक्ष यात्री प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना के साथ कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से उड़ान भरेंगे। नासा के अनुसार, यह मिशन वैज्ञानिक शोध, अंतरिक्ष तकनीक और भविष्य के मानव अंतरिक्ष अभियानों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।
वैज्ञानिक शोध
8 महीने तक करेंगे वैज्ञानिक शोध
नासा के अनुसार, अनिल ISS पर लगभग 8 महीने रहेंगे और अप्रैल, 2027 में पृथ्वी पर लौटेंगे। इस दौरान वह माइक्रोग्रैविटी में कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे।
उनका मुख्य फोकस लंबे अंतरिक्ष मिशनों के दौरान बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित करना और अंतरिक्ष में नई तकनीकों का परीक्षण करना होगा।
इन शोधों का लाभ भविष्य में चंद्रमा और मंगल जैसे मिशनों के साथ-साथ पृथ्वी पर स्वास्थ्य और विज्ञान के क्षेत्र में भी मिलेगा।
AI
AI और सेमीकंडक्टर पर करेंगे काम
अनिल अंतरिक्ष में सेमीकंडक्टर क्रिस्टल तैयार करने से जुड़े महत्वपूर्ण प्रयोगों पर भी काम करेंगे।
इनका उपयोग भविष्य में हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक मेडिकल उपकरणों के विकास में किया जा सकेगा।
इसके अलावा, वह ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) और AI की मदद से अल्ट्रासाउंड जांच की नई तकनीक का परीक्षण करेंगे, जिससे भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों में डॉक्टरों की दूर से मदद की जरूरत काफी कम हो सकती है।
अन्य अध्ययन
शरीर पर अंतरिक्ष के असर का करेंगे अध्ययन
इस मिशन के दौरान अनिल खुद भी कई मेडिकल रिसर्च का हिस्सा बनेंगे।
वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश करेंगे कि अंतरिक्ष में रक्त प्रवाह और शरीर के दूसरे अंगों पर माइक्रोग्रैविटी का क्या असर पड़ता है।
वह बायोप्रिंटिंग तकनीक पर भी काम करेंगे, जिससे भविष्य में नई चिकित्सा तकनीकों के विकास, उम्र बढ़ने से जुड़ी बीमारियों को समझने और बेहतर इलाज तैयार करने में महत्वपूर्ण मदद मिलने की उम्मीद है।