मंगल यात्रा होगी तेज, एस्टेरॉयड डाटा से वैज्ञानिकों ने खोजा नया रास्ता
क्या है खबर?
मंगल ग्रह की यात्रा अब तक काफी लंबी मानी जाती रही है, जिसमें आने-जाने में कई महीने और पूरे मिशन में एक साल से ज्यादा समय लगता है। हालांकि, एक्टा एस्ट्रोनॉटिका में छपी रिसर्च में दावा किया गया है कि इस समय को कम किया जा सकता है। रिसर्च के अनुसार, सही डाटा और नए रास्तों की मदद से कुल यात्रा समय लगभग 153 दिन तक लाया जा सकता है, जो पारंपरिक मिशन से सैकड़ों दिन कम हो सकता है।
रास्ता
कैसे मिला नया रास्ता?
वैज्ञानिकों ने इस स्टडी में एस्ट्रोयड के शुरुआती ऑर्बिटल डाटा का इस्तेमाल किया है, जिससे नए और ज्यादा सीधे रास्ते खोजे जा सकते हैं। आमतौर पर मिशन प्लानिंग ग्रहों की खास स्थिति पर निर्भर होती है, लेकिन इस तरीके में एस्ट्रोयड की गति और दिशा को ध्यान में रखकर रास्ता तय किया गया। इससे अंतरिक्ष यान को लंबा चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और यात्रा का समय काफी घट सकता है।
उपयुक्त समय
2031 का समय सबसे उपयुक्त बताया गया
स्टडी में अलग-अलग सालों के मंगल अपोजिशन को परखा गया, जिसमें 2027, 2029 और 2031 शामिल थे। रिसर्च में पाया गया कि 2031 का समय इस नए तरीके के लिए सबसे बेहतर है। इस दौरान ऐसे रास्ते संभव हैं जो तेजी से यात्रा पूरी कर सकते हैं। वैज्ञानिकों ने बताया कि इस समय में दो पूरे राउंड-ट्रिप मिशन भी संभव हो सकते हैं, जिससे भविष्य की योजना और आसान हो सकती है।
उम्मीद
भविष्य के मिशन के लिए बड़ी उम्मीद
इस नए तरीके से मंगल यात्रा का समय कम होने पर अंतरिक्ष यात्रियों के लिए जोखिम भी घट सकता है। कम समय का मतलब कम रेडिएशन खतरा और कम संसाधनों की जरूरत होगी। हालांकि, अभी इस तकनीक पर और परीक्षण जरूरी है, लेकिन यह स्टडी बताती है कि एस्ट्रोयड डाटा भविष्य में अंतरिक्ष मिशनों को तेज और सुरक्षित बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है और नई दिशा दे सकता है।