इबोला संकट से उबरने में भारत दे सकता है अहम योगदान, WHO की पूर्व वैज्ञानिक का बयान
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन का मानना है कि मौजूदा इबोला वायरस के संकट से निपटने में भारत एक अहम भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने बताया कि WHO की प्रयोगशालाओं और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के साथ मिलकर बंडिबुग्यो स्ट्रेन के लिए बेहतर टेस्ट, वैक्सीन और इलाज तैयार किए जा सकते हैं।
इस स्ट्रेन को पहचानना और इसका इलाज करना काफी चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि अभी जो मौजूदा उपकरण हैं वे अन्य स्ट्रेन के लिए विकसित किए गए हैं।
ICMR एंटीबॉडी के विकास में ला सकता है तेजी
स्वामीनाथन ने यह भी बताया कि भारत के पास डायग्नोस्टिक्स और वैक्सीन बनाने का अच्छा अनुभव है। उनके अनुसार, ICMR के जरिए भारत मोनोक्लोनल एंटीबॉडी के तेजी से विकास में अपना योगदान दे सकता है।
कांगो में बंडिबुग्यो प्रकोप के कारण अब तक 100 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं और कई लोगों की मौत भी हो चुकी है। भविष्य के प्रकोपों से निपटने के लिए mRNA तकनीक जैसे प्लेटफॉर्म बेहद अहम होते जा रहे हैं।
ऐसे में, भारत की कोविड-19 वैक्सीन की सफलता यह दिखाती है कि जरूरत पड़ने पर वह कितनी तेजी से समाधान विकसित कर सकता है।