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चिप की कीमत बढ़ाने के आरोप में सैमसंग, माइक्रोन और SK हाइनिक्स पर मुकदमा
चिप संकट के बीच तीन बड़ी कंपनियों पर मुकदमा

चिप की कीमत बढ़ाने के आरोप में सैमसंग, माइक्रोन और SK हाइनिक्स पर मुकदमा

Jun 29, 2026
11:26 am

क्या है खबर?

टेक सेक्टर इन दिनों मेमोरी चिप संकट से जूझ रहा है। दुनियाभर की कई बड़ी कंपनियां इस वजह से अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ाने को मजबूर हो गई हैं, जिसका सीधा असर ग्राहकों पर पड़ रहा है। इसी बीच, सैमसंग, SK हाइनिक्स और माइक्रोन के खिलाफ अमेरिका में मुकदमा दायर किया गया है। इन तीनों कंपनियों पर RAM की सप्लाई सीमित करने और कीमतें बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने का आरोप लगाया गया है।

वजह

क्यों हुआ तीनों कंपनियों पर मुकदमा?

अमेरिका के कैलिफोर्निया की एक संघीय अदालत में दायर शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तीनों कंपनियों ने 2022 से DRAM की सप्लाई जानबूझकर कम रखी है। शिकायत के मुताबिक, इस दौरान RAM की कीमतों में करीब 700 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई। आरोप है कि कंपनियों ने उत्पादन घटाया और बाजार में प्रतिस्पर्धा कम रखी, जिससे ग्राहकों और कारोबारियों को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। कंपनियों ने अभी तक इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

संकट

आखिर क्यों आया मेमोरी चिप संकट?

रिपोर्ट के अनुसार, AI डाटा सेंटर की तेजी से बढ़ती मांग के कारण कंपनियों ने हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) चिप्स पर ज्यादा ध्यान देना शुरू कर दिया। इससे सामान्य स्मार्टफोन, लैपटॉप और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली DRAM की सप्लाई कम हो गई। माइक्रोन ने अपना कंज्यूमर मेमोरी कारोबार भी बंद कर AI ग्राहकों पर फोकस बढ़ा दिया है। इसी वजह से बाजार में मेमोरी चिप की कमी और कीमतों का दबाव लगातार बढ़ता गया।

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बाजार

नए सप्लायर के लिए बाजार में उतरना आसान नहीं

मुकदमे में कहा गया है कि नई DRAM फैक्ट्री लगाने पर 15 से 20 अरब डॉलर (लगभग 1,400 से 1,900 अरब रुपये) तक का खर्च आता है और इसे तैयार होने में कई साल लगते हैं। इसके अलावा अत्याधुनिक तकनीक, व्यापारिक गोपनीयता, निर्यात नियम और लंबी परीक्षण प्रक्रिया नए खिलाड़ियों के लिए बड़ी चुनौती हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इसी कारण दूसरी कंपनियां तुरंत उत्पादन बढ़ाकर बाजार में संतुलन नहीं बना सकतीं और कीमतें ऊंची बनी रहती हैं।

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आरोप

पहले भी लग चुके हैं ऐसे आरोप

मुकदमे में दावा किया गया है कि यह पहली बार नहीं है जब इन कंपनियों पर ऐसे आरोप लगे हैं। शिकायत में 1998 से 2022 और 2016 से 2018 के बीच कीमतों में कथित हेरफेर के मामलों का भी जिक्र किया गया है। वादी पक्ष ने अदालत से कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, मुआवजा और बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बहाल करने की मांग की है। फिलहाल मामले की सुनवाई की तारीख तय नहीं की गई है।

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