धरती की ओर बढ़ रहा शक्तिशाली सौर तूफान, भारत में कहां दिख सकता हैं अरोरा?
क्या है खबर?
सूर्य पर मौजूद एक सनस्पॉट में विस्फोट के कारण एक शक्तिशाली तूफान तेजी से पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है। नासा के अनुसार, यह सौर तूफान 8 या 9 जून को पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकरा सकता है। हाल ही में आए कुछ अन्य सौर तूफानों के मुकाबले इसे काफी शक्तिशाली माना जा रहा है। इसी वजह से भारत समेत दुनिया के कई अन्य हिस्सों में रंग-बिरंगे ऑरोरा यानी नॉर्दर्न लाइट्स दिखाई देने की संभावना बढ़ गई है।
CME
क्या होता है कोरोनल मास इजेक्शन?
यह घटना तब होती है जब सूर्य से प्लाज्मा और चुंबकीय ऊर्जा का बड़ा हिस्सा अंतरिक्ष में निकलता है। वैज्ञानिक इसे कोरोनल मास इजेक्शन (CME) कहते हैं। जब यह पृथ्वी की ओर बढ़ता है, तो हमारे ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र के साथ इसकी प्रतिक्रिया होती है। इसी कारण भू-चुंबकीय तूफान बनता है। यह प्रक्रिया आसमान में हरे, लाल और बैंगनी रंग की रोशनी पैदा कर सकती है, जिसे ऑरोरा या नॉर्दर्न लाइट्स कहा जाता है।
जगह
भारत में कहां दिख सकता है ऑरोरा?
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मौसम साफ रहा और सौर तूफान पर्याप्त ताकतवर हुआ, तो भारत के कुछ उत्तरी इलाकों में ऑरोरा दिखाई दे सकता है। लद्दाख के हानले डार्क स्काई रिजर्व, पैंगोंग झील और नुब्रा घाटी को इसके लिए सबसे उपयुक्त स्थान माना जा रहा है। इसके अलावा, अरुणाचल प्रदेश के तवांग और लद्दाख के अन्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी हल्की रंगीन चमक दिखाई देने की संभावना जताई गई है।
असर
संचार और सैटेलाइट सेवाओं पर पड़ सकता है असर
भू-चुंबकीय तूफान का असर केवल आसमान तक सीमित नहीं रहता। इससे सैटेलाइट संचालन, रेडियो संचार, नेविगेशन सिस्टम और बिजली नेटवर्क पर भी हल्का प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार संभावित असर सीमित और संभालने योग्य रहेगा। दुनियाभर की अंतरिक्ष एजेंसियां और स्पेस वेदर केंद्र इस घटना पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और नई जानकारी मिलने पर समय-समय पर अपडेट जारी कर रहे हैं।