AI को लेकर पोप ने जारी किया धर्मपत्र, इसमें कहा- मशीनें सिर्फ इंसानी नकल
पोप लियो XIV ने अभी 'मैग्निफिका ह्यूमेनिटास' नाम का एक विश्वपत्र जारी किया है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े कुछ बड़े सवालों पर बात की गई है।
दरअसल, एंथ्रोपिक के AI रिसर्चर क्रिस ओलाह की टिप्पणियों ने इस बहस को जन्म दे दिया था कि क्या मशीनें कभी सच में जागरूक हो सकती हैं।
ओलाह ने बताया था कि जो एडवांस AI मॉडल्स हैं, उनमें दिमाग जैसी संरचनाएं पाई जाती हैं। इतना ही नहीं, इनमें ऐसी आंतरिक स्थितियां भी दिखती हैं, जो इंसानी भावनाओं, जैसे खुशी, डर या गम से काफी मिलती-जुलती हैं।
व्यवहार की नकल करता है AI
ओलाह की इन रहस्यमयी' खोजों के बावजूद, पोप का कहना है कि AI सिर्फ डाटा को प्रोसेस करके इंसानी व्यवहार की नकल करता है। यह असल में भावनाएं महसूस नहीं करता और न ही नैतिकता को समझ पाता है।
यह विश्वपत्र चेतावनी देता है कि हम स्मार्ट तकनीक को असली मानवीय अनुभव न समझें। मशीनों में इंसानियत का वो आध्यात्मिक और नैतिक पहलू मौजूद नहीं होता।
AI के सावधानीपूर्वक इस्तेमाल की अपील
'मैग्निफिका ह्यूमेनिटास' में AI के सतर्क और नैतिक इस्तेमाल की अपील की गई है, खासकर जब यह और ज्यादा एडवांस होता जा रहा है। यह दस्तावेज AI की सीमाओं और उसकी अनिश्चितता को उजागर करता है। साथ ही, इसके इस्तेमाल में सावधानी बरतने पर जोर देता है।