असम में बाढ़ के खतरों से निपटने के लिए तकनीकों का हो रहा इस्तेमाल
असम में आई बाढ़ ने 1.68 लाख से ज्यादा लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है। अब तक 97 लोगों की जान जा चुकी है।
15 जिलों में फैले राहत कैंपों में 10,000 से ज्यादा लोग रह रहे हैं। इस मुश्किल घड़ी में लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए नई-नई तकनीकें भी आगे आ रही हैं।
राहत कार्यों में बढ़ा तालमेल
जावेद साइकिया ने एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) व्हाट्सऐप टूल 'जल रक्षा' बनाया है। इसकी मदद से बाढ़ में फंसे लोग अपनी लोकेशन और जरूरतों के बारे में तुरंत जानकारी दे सकते हैं, जिससे NGO उन तक तेजी से मदद पहुंचा पाते हैं।
पार्थ बोरठाकुर की ओर से तैयार किया Banpani.org यह दिखाता है कि किन इलाकों में सबसे ज्यादा मदद की जरूरत है और कहां भरोसेमंद जगहों पर दान किया जा सकता है।
फिरिंगोटी का 'हेल्पमॉन्क' जियोटैगिंग और लाइव अपडेट्स का इस्तेमाल कर दानदाताओं को सीधे जमीनी स्तर पर काम कर रहे लोगों से जोड़ता है।
इसके संस्थापकों का मानना है कि इन टूल्स का सही असर तभी दिखेगा, जब सभी मिलकर काम करें और इनकी जानकारी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे।