एनवीडिया समेत अन्य कंपनियों का दावा, AI डाटा सेंटरों में पानी की खपत हुई कम
क्या है खबर?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग काफी तेजी से बढ़ रहा है। इनके डाटा सेंटरों को संचालित करने के लिए बड़े स्तर पर ऊर्जा और पानी खर्च होता है। हालांकि, अब मेटा, माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया और अमेजन वेब सर्विसेज (AWS) जैसी कंपनियां डाटा सेंटरों में पानी की बर्बादी कम करने और उसके बेहतर उपयोग का दावा कर रही हैं। कंपनियां नई कूलिंग तकनीक के जरिए सर्वर को ठंडा रखने के लिए पानी की जरूरत घटाने पर काम कर रही हैं।
तरीका
एनवीडिया ने बताया नया तरीका
एनवीडिया का नया सिस्टम डाटा सेंटर के सर्वर और चिप्स को ठंडा करने के लिए बंद कूलिंग व्यवस्था का इस्तेमाल करता है।
इसमें लिक्विड को सीधे चिप्स के पास से गुजारा जाता है और वह बंद पाइप में लगातार घूमता रहता है। इससे पानी बाहर निकलकर बर्बाद नहीं होता। कुछ जगहों पर इस तकनीक की मदद से पानी की खपत लगभग पूरी तरह खत्म की जा सकती है।
हालांकि, इसके लिए दूसरी जरूरतें भी बढ़ सकती हैं।
बिजली
पानी की जगह बढ़ सकती है बिजली की खपत
विशेषज्ञों के मुताबिक, डाटा सेंटरों में पानी की खपत कम करना आसान नहीं है। बंद कूलिंग सिस्टम में लिक्विड को ठंडा रखने के लिए ज्यादा बिजली की जरूरत पड़ सकती है।
एनवीडिया अपने सिस्टम में लिक्विड को सामान्य से ज्यादा गर्म रहने देता है, जिससे हर समय ठंडी हवा चलाने की जरूरत कम होती है। लेकिन गर्म मौसम और हीटवेव के दौरान अतिरिक्त कूलिंग की जरूरत पड़ सकती है।
ऐसे में बिजली की खपत बढ़ने का खतरा है।
खर्च
डाटा सेंटर के बाहर भी पानी खर्च
माइक्रोसॉफ्ट, मेटा और AWS भी पानी बचाने वाली कूलिंग तकनीक पर काम कर रही हैं।
हालांकि, डाटा सेंटर में पानी का इस्तेमाल सिर्फ सर्वर ठंडा करने तक सीमित नहीं है। इन सेंटरों को चलाने वाली बिजली बनाने और चिप्स व सर्वर तैयार करने में भी पानी खर्च होता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका में यह अप्रत्यक्ष पानी खपत डाटा सेंटर की सीधी खपत से दोगुनी तक हो सकती है। इसलिए कंपनियों के प्रयासों के बावजूद चुनौती बड़ी है।