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नासा चांद पर बनाएगी बेस, कितनी रकम इस मिशन पर होगी खर्च?
नासा चांद पर बनाएगी बेस

नासा चांद पर बनाएगी बेस, कितनी रकम इस मिशन पर होगी खर्च?

Mar 25, 2026
01:58 pm

क्या है खबर?

अंतरिक्ष एजेंसी नासा अब अपने चंद्र मिशन को लेकर एक बड़ा बदलाव कर रही है। नासा ने चांद की कक्षा में बनने वाले 'लूनर गेटवे' स्पेस स्टेशन की योजना को रोकने का फैसला लिया है। इसके बजाय अब एजेंसी अगले सात वर्षों में चांद की सतह पर 20 अरब डॉलर (लगभग 1,900 अरब रुपये) खर्च कर एक बेस बनाने की तैयारी कर रही है, जिससे वहां लंबे समय तक इंसानी मौजूदगी बनाई जा सके।

निर्माण

इसाकमैन ने बताया क्यों बदला प्लान?

नासा प्रमुख जेरेड इसाकमैन ने कहा कि गेटवे प्रोजेक्ट को मौजूदा रूप में रोकना कोई हैरानी की बात नहीं है। उन्होंने बताया कि अब फोकस ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर पर होगा जो चांद की सतह पर लगातार काम को सपोर्ट कर सके। इसाकमैन के अनुसार, यह बदलाव आर्टेमिस मिशन के तहत किए जा रहे बड़े सुधारों का हिस्सा है, जिससे चांद पर सीधे काम करना आसान और ज्यादा प्रभावी बनाया जा सके।

उपयोग

कैसे होगा निर्माण और क्या होगा उपयोग?

इसाकमैन ने कहा कि इस बेस को बनाने के लिए मौजूदा उपकरणों और विदेशी सहयोगियों की कमिटमेंट को नए तरीके से इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि, उन्होंने माना कि हार्डवेयर और समय से जुड़ी कई चुनौतियां भी सामने आएंगी। यह बेस अंतरिक्ष यात्रियों को चांद पर उतरने, रिसर्च करने और लंबे समय तक वहां रहने में मदद करेगा। इससे चांद पर लगातार मिशन चलाने और आगे की स्पेस योजनाओं को मजबूत करने में सहायता मिलेगी।

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समय

तैयारी की समयसीमा पर क्या कहा गया?

नासा ने इस प्रोजेक्ट पर अगले सात सालों में काम करने की बात जरूर कही है, लेकिन इसे पूरी तरह कब तक तैयार किया जाएगा, इसकी कोई तय और स्पष्ट तारीख अभी तक साफ तौर पर नहीं बताई गई है। इसाकमैन ने भी समय को लेकर कोई निश्चित डेडलाइन नहीं दी। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि काम तेजी से आगे बढ़ेगा और मौजूदा योजनाओं को नए तरीके से लागू किया जाएगा।

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योजना

अन्य बदलाव और बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा

इस फैसले से आर्टेमिस मिशन से जुड़े बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स में बदलाव देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही, यह कदम ऐसे समय में लिया गया है जब चीन 2030 तक चांद पर पहुंचने की तैयारी कर रहा है। नासा ने यह भी बताया कि वह भविष्य में न्यूक्लियर पावर और डीप स्पेस मिशन पर भी काम कर रहा है। इसका मकसद अंतरिक्ष में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखना और नई तकनीकों को तेजी से आगे बढ़ाना है।

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