मेटल वाले रहस्यमयी एस्ट्रोयड की ओर बढ़ा नासा का साइकी मिशन, क्यों है खास?
क्या है खबर?
नासा का साइकी मिशन अब एक बड़े और अहम चरण में पहुंच गया है। साइकी अंतरिक्ष यान मेटल से भरे एस्ट्रोयड 16 साइकी की ओर लगातार आगे बढ़ रहा है। 15 मई को यह अंतरिक्ष यान मंगल ग्रह के पास से गुजरते हुए एक खास ग्रेविटी असिस्ट मैनूवर करेगा। इस प्रक्रिया से अंतरिक्ष यान की रफ्तार बढ़ेगी और उसका रास्ता सही दिशा में सेट होगा। नासा के वैज्ञानिक इसे मिशन का बेहद महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।
मिशन
मेटल वाला एस्ट्रोयड बना वैज्ञानिकों की दिलचस्पी
नासा का यह मिशन एस्ट्रोयड 16 साइकी की स्टडी के लिए भेजा गया है, जो मंगल और बृहस्पति ग्रह के बीच मौजूद है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह किसी पुराने ग्रह का खुला हुआ धातु वाला कोर हो सकता है। आम एस्ट्रोयड की तुलना में इसमें लोहा और निकल काफी ज्यादा मात्रा में हो सकता है। इसी वजह से यह एस्ट्रोयड वैज्ञानिकों के लिए बेहद खास बना हुआ है। इससे सौरमंडल के इतिहास को समझने में मदद मिलेगी।
रफ्तार
मंगल ग्रह की मदद से बढ़ेगी अंतरिक्ष यान की रफ्तार
15 मई को साइकी अंतरिक्ष यान मंगल के गुरुत्वाकर्षण से अपनी स्पीड बढ़ाएगा। इस प्रक्रिया को ग्रेविटी असिस्ट या स्लिंगशॉट मैनूवर कहा जाता है। इसमें ग्रह की गुरुत्वाकर्षण शक्ति अंतरिक्ष यान को खींचकर आगे की दिशा में तेज रफ्तार से भेजती है। इससे काफी ईंधन की बचत भी होती है। नासा लंबे अंतरिक्ष मिशनों में इस तकनीक का अक्सर इस्तेमाल करती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह मैनूवर सफल रहा तो अंतरिक्ष यान तय समय पर एस्ट्रोयड बेल्ट तक पहुंच सकेगा।
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ग्रहों के रहस्य समझने में मदद करेगा मिशन
वैज्ञानिकों का मानना है कि 16 साइकी किसी प्राचीन ग्रह का अंदरूनी धातु वाला हिस्सा हो सकता है। अगर यह बात सही साबित होती है, तो इससे पृथ्वी जैसे ग्रहों के बनने की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा। रिसर्चर्स एस्ट्रोयड की सतह, बनावट और मैग्नेटिक फील्ड की विस्तार से जांच करेंगे। इस मिशन से यह भी पता चल सकता है कि शुरुआती सौरमंडल में टक्करें और बड़े बदलाव किस तरह हुए थे।
अन्य
15 मई के खास पल पर टिकी दुनियाभर की नजर
वैज्ञानिक और अंतरिक्ष प्रेमी 15 मई का इंतजार कर रहे हैं। मंगल ग्रह के पास से सफल गुजरने के बाद साइकी अंतरिक्ष यान अपनी मंजिल की ओर और तेजी से बढ़ेगा। नासा का कहना है कि यह मिशन इंसानों की अंतरिक्ष को समझने की कोशिशों में बड़ा कदम साबित हो सकता है। आने वाले वर्षों में यह मिशन कई नए राज खोल सकता है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इससे सौरमंडल और ग्रहों की शुरुआत से जुड़ी अहम जानकारियां मिलेंगी।