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मंगल को पीछे छोड़ अपने असली लक्ष्य एस्ट्रोयड 16 की ओर बढ़ा नासा का साइकी मिशन
मेटल वाले एस्ट्रोयड की ओर बढ़ रहा नासा का मिशन

मंगल को पीछे छोड़ अपने असली लक्ष्य एस्ट्रोयड 16 की ओर बढ़ा नासा का साइकी मिशन

May 21, 2026
11:06 am

क्या है खबर?

नासा का साइकी मिशन अब मेटल से भरपूर एस्ट्रोयड 16 साइकी की ओर बढ़ रहा है। यह एस्ट्रोयड किसी टूटे हुए छोटे ग्रह का कोर हो सकता है। मिशन का मकसद इसकी सच्चाई पता करना और ग्रहों के अंदरूनी हिस्सों के बारे में जानकारी जुटाना है। नासा को उम्मीद है कि इससे पृथ्वी के कोर को समझने में भी मदद मिलेगी। यह मिशन भविष्य में सौर मंडल के शुरुआती इतिहास को समझने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

तस्वीरें

मंगल के पास से गुजरते हुए ली तस्वीरें

साइकी स्पेसक्राफ्ट ने 15 मई को मंगल ग्रह के पास से अपनी फ्लाईबाई पूरी की और इस दौरान उसने मंगल की नई तस्वीरों को भी कैप्चर किया। इनमें दक्षिणी ध्रुव की बर्फीली टोपी, वैलेस मेरिनेरिस क्षेत्र और बड़े क्रेटर साफ दिखाई दिए। नासा के अनुसार, यह फ्लाईबाई सिर्फ तस्वीरों के लिए नहीं थी, बल्कि इससे स्पेसक्राफ्ट को अतिरिक्त गति भी मिली। वैज्ञानिकों ने बताया कि मंगल की गुरुत्वाकर्षण ताकत से इसकी रफ्तार करीब 1,600 किलोमीटर प्रति घंटा बढ़ गई है।

टेस्टिंग

वैज्ञानिक उपकरणों की हुई टेस्टिंग

नासा ने इस फ्लाईबाई का इस्तेमाल साइकी मिशन के सभी वैज्ञानिक उपकरणों को जांचने और कैलिब्रेट करने के लिए भी किया। स्पेसक्राफ्ट में मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजर, मैग्नेटोमीटर और गामा-रे व न्यूट्रॉन स्पेक्ट्रोमीटर जैसे उपकरण लगे हैं। इसके अलावा इसमें डीप स्पेस ऑप्टिकल कम्युनिकेशन सिस्टम भी है, जो लेजर तकनीक से डेटा भेजेगा। नासा का कहना है कि यह सिस्टम भविष्य में अंतरिक्ष संचार को मौजूदा तकनीक से करीब 100 गुना तेज बना सकता है।

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लक्ष्य

2029 में पहुंचेगा अपने असली लक्ष्य तक

नासा के अनुसार, साइकी मिशन सीधे एस्ट्रोयड 16 साइकी की ओर बढ़ रहा है और मई, 2029 में वहां पहुंचना शुरू करेगा। जुलाई, 2029 तक यह एस्ट्रोयड की कक्षा में प्रवेश कर जाएगा। मिशन करीब 26 महीने तक चलेगा, जिसमें स्पेसक्राफ्ट अलग-अलग ऊंचाई से इसकी जांच करेगा। वैज्ञानिक खास तौर पर यह जानना चाहते हैं कि क्या यह सच में किसी ग्रह का धातु वाला कोर है या फिर सौरमंडल के शुरुआती दौर का कोई अलग प्रकार का पदार्थ है।

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