नासा क्रू-12 के अंतरिक्ष यात्री 237 दिन बाद पृथ्वी पर लौटे, क्यों खास रहा यह मिशन?
क्या है खबर?
नासा और स्पेस-X का क्रू-12 मिशन 7 महीने से ज्यादा समय अंतरिक्ष में बिताने के बाद सुरक्षित धरती पर लौट आया है। 4 अंतरिक्ष यात्रियों का दल 8 अक्टूबर, 2026 को लॉस एंजिल्स के तट के पास प्रशांत महासागर में उतरा। इस मिशन के दौरान दल ने अंतरिक्ष में 237 दिन बिताए और पृथ्वी के 3,792 से ज्यादा चक्कर लगाए। वापसी के बाद बचाव दल ने अंतरिक्ष यान से सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला।
मिशन
क्यों खास रहा यह मिशन?
क्रू-12 मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) पर कई वैज्ञानिक प्रयोग किए।
इनमें स्टेम सेल बनाने, इंसानी सेहत, पोषण और शरीर में खून के बहाव से जुड़े अध्ययन शामिल थे। इन प्रयोगों का उद्देश्य लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने वाले यात्रियों को स्वस्थ और सुरक्षित रखने के तरीके खोजना था।
मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने स्पेसवॉक भी किए और स्टेशन के रखरखाव से जुड़े काम पूरे किए। इससे भविष्य में मदद मिल सकती है।
यात्री
4 अंतरिक्ष यात्रियों ने मिशन में लिया हिस्सा
क्रू-12 में नासा की जेसिका मीर और जैक हैथवे, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) की सोफी एडेनोट और रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस के आंद्रे फेड्याव शामिल थे।
जेसिका मीर ने मिशन के दौरान 4 स्पेसवॉक किए, जिससे उनके करियर में इनकी कुल संख्या 7 हो गई। वहीं, सोफी एडेनोट ने 3 स्पेसवॉक पूरे किए और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के बाहर जाने वाली पहली फ्रांसीसी महिला बनीं।
यह जैक हैथवे और सोफी एडेनोट की पहली अंतरिक्ष यात्रा थी।
अन्य
भविष्य के चांद और मंगल मिशन की तैयारी में मदद
क्रू-12 मिशन 13 फरवरी, 2026 को रवाना हुआ और अगले दिन ISS पहुंचा था।
वापसी के दौरान अंतरिक्ष यान ने 10 करोड़ मील से ज्यादा की दूरी तय की। नासा के लिए ऐसे मिशन अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने के असर को समझने और नई तकनीकों को परखने का मौका देते हैं।
इनसे भविष्य में चांद और मंगल पर इंसानों को भेजने की तैयारी में मदद मिल सकती है। मिशन के वैज्ञानिक नतीजों की जानकारी आगे साझा की जाएगी।