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नासा का आर्टेमिस II मिशन लॉन्च, अंतरिक्ष में कैसे खाएंगे और सोएंगे अंतरिक्ष यात्री?
नासा का आर्टेमिस II मिशन लॉन्च

नासा का आर्टेमिस II मिशन लॉन्च, अंतरिक्ष में कैसे खाएंगे और सोएंगे अंतरिक्ष यात्री?

Apr 02, 2026
06:18 am

क्या है खबर?

अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने आज (2 अप्रैल) सुबह करीब 4:00 बजे अपने आर्टेमिस II अंतरिक्ष मिशन को लॉन्च कर दिया है। इस मिशन के तहत 50 साल बाद इंसान फिर चांद की तरफ भेजे गए हैं। चार अंतरिक्ष यात्री करीब 10 दिन तक अंतरिक्ष में रहेंगे और चांद का चक्कर लगाएंगे। यह मिशन एक टेस्ट फ्लाइट है, जिसमें नई तकनीकों और सिस्टम की जांच की जाएगी, ताकि भविष्य में इंसानों को चांद की सतह पर सुरक्षित उतारा जा सके।

अनुभव

अंतरिक्ष में कैसा होगा रहने का अनुभव?

इस पूरे मिशन के दौरान सभी अंतरिक्ष यात्री ओरियन कैप्सूल में रहेंगे, जो आकार में एक मिनी वैन जैसा है। इसमें सीमित जगह होगी, जहां सभी को साथ रहना और काम करना होगा। माइक्रोग्रैविटी की वजह से वे हवा में तैरते रहेंगे, जिससे जगह का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा। हालांकि, इतनी लंबी यात्रा में सीमित जगह और लगातार साथ रहने की स्थिति उनके धैर्य और तालमेल की भी परीक्षा लेगी।

खाना

खाना और पानी की व्यवस्था कैसी होगी?

अंतरिक्ष यात्री इस मिशन के दौरान फ्रीज-ड्राइड यानी सूखे खाने पर निर्भर रहेंगे, जिसे पानी मिलाकर खाया जाता है। हर सदस्य के लिए तय मेन्यू होगा, जो उनकी जरूरत और पसंद के अनुसार बनाया गया है। पानी सीमित मात्रा में होगा, जिसे पीने और खाना बनाने दोनों के लिए बांटना होगा। एक छोटा फूड वार्मर भी होगा, जिससे खाने को गर्म किया जा सकेगा, ताकि उन्हें थोड़ा सामान्य अनुभव मिल सके।

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नींद

नींद और दैनिक जीवन कैसे चलेगा

सोने के लिए अंतरिक्ष यात्री झूले जैसे स्लीपिंग बैग में सोएंगे, जो कैप्सूल के अंदर लटकाए जाते हैं। माइक्रोग्रैविटी में सोना थोड़ा अलग अनुभव होता है, लेकिन शरीर को आराम देना जरूरी होगा। वे हर दिन एक तय समय पर सोएंगे और उठेंगे। नहाने की सुविधा नहीं होगी, इसलिए वे वेट वाइप्स और सीमित साधनों से खुद को साफ रखेंगे, जिससे पूरे मिशन में सीमित संसाधनों में ही दैनिक जीवन चलाना होगा।

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फिटनेस

मानसिक और शारीरिक फिटनेस का कैसे रखेंगे ध्यान

इस मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री अपनी फिटनेस बनाए रखने के लिए हल्की एक्सरसाइज करेंगे, ताकि शरीर पर असर कम पड़े। मानसिक स्वास्थ्य भी अहम होगा, क्योंकि लंबे समय तक सीमित जगह में रहना चुनौतीपूर्ण होता है। इसके लिए वे आपस में बातचीत करेंगे, टीमवर्क बनाए रखेंगे और नियमित दिनचर्या फॉलो करेंगे। ट्रेनिंग के दौरान बनी समझ और तालमेल उन्हें इस कठिन मिशन में मजबूत बनाए रखने में मदद करेगी।

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