नासा के आर्टेमिस II मिशन का तीसरा दिन, आज क्या कुछ करेंगे अंतरिक्ष यात्री?
क्या है खबर?
अंतरिक्ष एजेंसी नासा को आर्टेमिस II मिशन लॉन्च किए 2 दिन बीत गए हैं और आज तीसरा दिन है। अंतरिक्ष यात्रियों ने कुछ घंटे पहले इस मिशन के दौरान अंतरिक्ष से पृथ्वी की पहली तस्वीर भी साझा की है। अब सभी अंतरिक्ष यात्री डीप स्पेस मिशन की लय में आ चुके हैं और अपने तय शेड्यूल के अनुसार अलग-अलग वैज्ञानिक और तकनीकी काम करने में लगे हुए हैं, जिससे मिशन को आगे बढ़ाया जा सके।
ट्रैजेक्टरी सुधार
ट्रैजेक्टरी सुधार के लिए अहम बर्न होगा
आज के दिन अंतरिक्ष यात्री सबसे पहले ट्रैजेक्टरी करेक्शन बर्न की तैयारी करेंगे। यह एक छोटा लेकिन बहुत जरूरी ऑपरेशन होता है, जिससे अंतरिक्ष यान का रास्ता सही किया जाता है। यह बर्न कुछ सेकंड का होगा, लेकिन इससे स्पीड और दिशा दोनों को संतुलित किया जाएगा। इस प्रक्रिया से यह पक्का किया जाएगा कि अंतरिक्ष यान सही दिशा में चांद की ओर आगे बढ़ता रहे और मिशन सुरक्षित तरीके से पूरा हो सके।
तैयारी
चांद के अवलोकन के लिए तैयारी
तीसरे दिन अंतरिक्ष यात्री चांद के पास होने वाले अवलोकन की तैयारी भी करेंगे। इसके लिए वे केबिन के अंदर कैमरे और अन्य उपकरण सेट करेंगे। सीमित जगह में माइक्रोग्रैविटी के बीच काम करना चुनौतीपूर्ण होता है, इसलिए हर मूवमेंट को ध्यान से प्लान किया जा रहा है। अलग-अलग लेंस वाले कैमरों को तैयार किया जाएगा ताकि चांद के पास से गुजरते समय बेहतर तस्वीरें और डाटा इकट्ठा किया जा सके।
स्वास्थ्य
स्वास्थ्य और इमरजेंसी अभ्यास पर फोकस
आज अंतरिक्ष यात्री अपने स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े अभ्यास भी करेंगे। इसमें CPR और चोकिंग जैसी इमरजेंसी स्थितियों से निपटने का अभ्यास शामिल है। इसके साथ ही वे नियमित एक्सरसाइज भी करेंगे, जिससे शरीर फिट बना रहे। स्पेस में लंबे समय तक रहने के दौरान शरीर पर असर पड़ता है, इसलिए फिटनेस बनाए रखना बहुत जरूरी होता है, और यह अभ्यास मिशन के दौरान उनकी सेहत को सुरक्षित रखने में मदद करता है।
कम्युनिकेशन
कम्युनिकेशन सिस्टम और डाटा ट्रांसफर टेस्ट
दिन के अंत में अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष यान के कम्युनिकेशन सिस्टम की जांच करेंगे। इसके तहत पृथ्वी से संपर्क बनाए रखने वाले सिस्टम को टेस्ट किया जाएगा। डीप स्पेस नेटवर्क के जरिए डाटा और वीडियो पृथ्वी पर भेजे जाएंगे। यह टेस्ट इसलिए जरूरी है ताकि जैसे-जैसे अंतरिक्ष यान पृथ्वी से दूर जाता जाए, संपर्क मजबूत बना रहे और किसी भी स्थिति में मिशन कंट्रोल से जुड़ाव बना रहे।