नासा का आर्टेमिस II मिशन हुआ पूरा, अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी पर लौटे
क्या है खबर?
अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपने आर्टेमिस II मिशन को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, इस मिशन के चारों अंतरिक्ष यात्री ओरियन अंतरिक्ष यान में सवार होकर पृथ्वी पर वापस लौट आए हैं। यह लैंडिंग भारतीय समय के अनुसार शनिवार, 11 अप्रैल को सुबह करीब 5:37 बजे प्रशांत महासागर में हुई। इस मिशन के साथ चांद तक जाकर सुरक्षित लौटने वाले इंसानों की संख्या 28 हो गई है, जो अंतरिक्ष इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
यात्रा
10 दिन की यात्रा का सफल अंत
यह मिशन करीब 10 दिन तक चला, जिसमें तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री शामिल थे। यह 1972 के अपोलो मिशन के बाद पहली बार था जब इंसान चांद की कक्षा से आगे गए। मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से करीब 2.5 लाख मील दूर तक पहुंचे। इस यात्रा ने यह साबित किया कि नासा फिर से इंसानों को चांद के आसपास सुरक्षित भेजने और वापस लाने में सक्षम है।
टेस्ट
मिशन के दौरान कई अहम टेस्ट किए गए
इस मिशन के दौरान ओरियन यान के कई जरूरी सिस्टम का परीक्षण किया गया। इसमें लाइफ सपोर्ट सिस्टम, स्पेससूट और रेडिएशन मापने वाले उपकरण शामिल थे। हालांकि, यात्रा के दौरान कुछ छोटी समस्याएं भी आईं, जैसे टॉयलेट सिस्टम में खराबी, जिसे अंतरिक्ष यात्रियों ने ठीक किया। इन टेस्ट से मिले डाटा का इस्तेमाल भविष्य के मिशनों में किया जाएगा, खासकर आर्टेमिस III के लिए, जिसमें चांद पर लैंडिंग की योजना है।
अनुभव
अंतरिक्ष यात्रियों के अनुभव और भावनाएं
इन मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने चांद और पृथ्वी के शानदार दृश्य देखे। उन्होंने इस अनुभव को भावुक और यादगार बताया है। अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच ने कहा कि चांद को इतने करीब से देखना बेहद खास पल था। इस मिशन में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां भी जुड़ीं, जैसे पहली महिला और पहले गैर-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री का चांद के पास जाकर लौटना, जिसने इस मिशन को और खास बना दिया।
मिशन
आगे के मिशनों के लिए खुला रास्ता
इस सफल मिशन के बाद अब नासा का ध्यान अगले चरण पर है। आर्टेमिस II की सफलता से 2028 में चांद पर इंसानों की लैंडिंग का रास्ता साफ हुआ है। यह मिशन न सिर्फ तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि इससे अंतरिक्ष में लंबे समय तक इंसानों की मौजूदगी की तैयारी भी मजबूत हुई है। आने वाले समय में चांद पर बेस बनाने की योजना भी इसी सफलता पर आधारित होगी, जो अंतरिक्ष अन्वेषण को नई दिशा देगा।