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नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप पहुंचा केनेडी स्पेस सेंटर, क्या है इसकी खासियत?
नासा का नया स्पेस टेलीस्कोप केनेडी स्पेस सेंटर पहुंचा

नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप पहुंचा केनेडी स्पेस सेंटर, क्या है इसकी खासियत?

Jun 22, 2026
12:09 pm

क्या है खबर?

नासा की अगली स्पेस टेलिस्कोप नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस केनेडी स्पेस सेंटर पहुंच गया है। इसे एक विशेष सुरक्षा कंटेनर में लाया गया, जिसे 'चैरियट' नाम दिया गया है। इस टेलीस्कोप का नाम नासा की पहली चीफ ऑफ एस्ट्रोनॉमी नैन्सी ग्रेस रोमन के सम्मान में रखा गया है। नासा के मुताबिक, रोमन ने हबल स्पेस टेलीस्कोप को संभव बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। इसी वजह से उन्हें 'मदर ऑफ हबल' भी कहा जाता है।

खासियत

हबल से कई गुना तेज होगा नया टेलीस्कोप

नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप की सबसे बड़ी खासियत इसका शक्तिशाली कैमरा है। इसमें 300MP का वाइड फील्ड इंस्ट्रूमेंट लगाया गया है, जिसमें 18 डिटेक्टर मौजूद हैं। नासा के अनुसार, यह टेलीस्कोप हबल की तुलना में लगभग 100 गुना बड़ा क्षेत्र एक साथ देख सकता है। इसके साथ ही, यह समान रेजोल्यूशन के साथ कहीं ज्यादा तेजी से काम करेगा और अंतरिक्ष की तस्वीरें पहले से कहीं अधिक तेजी से जुटा सकेगा।

लाभ

डार्क यूनिवर्स के रहस्यों को समझने में मिलेगी मदद

यह टेलीस्कोप वैज्ञानिकों को डार्क मैटर और डार्क एनर्जी जैसे ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों को समझने में मदद करेगा। वैज्ञानिक यह जानना चाहते हैं कि ब्रह्मांड के लगातार तेज गति से फैलने की असली वजह क्या है। नासा का मानना है कि रोमन स्पेस टेलीस्कोप से मिले आंकड़े यह समझने में मदद करेंगे कि ब्रह्मांड के विस्तार के पीछे डार्क एनर्जी जिम्मेदार है या फिर गुरुत्वाकर्षण के बारे में हमारी मौजूदा समझ अधूरी है।

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लॉन्च

दूसरे सौर मंडलों के ग्रहों की भी करेगा खोज

रोमन स्पेस टेलीस्कोप में एक विशेष क्रोनोग्राफ उपकरण भी लगाया गया है। इसकी मदद से वैज्ञानिक दूर स्थित तारों के आसपास मौजूद एक्सोप्लैनेट यानी दूसरे सौर मंडलों के ग्रहों की हल्की रोशनी का अध्ययन कर सकेंगे। यह तकनीक उन ग्रहों को खोजने में मदद करेगी, जिन्हें सीधे देख पाना बहुत मुश्किल होता है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस मिशन से दूसरे ग्रहों और संभावित जीवन की परिस्थितियों को समझने में भी नई जानकारी मिल सकती है।

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लॉन्च

अगस्त में लॉन्च की तैयारी

टेलीस्कोप अब 70 दिनों की प्री-लॉन्च तैयारियों से गुजरेगा, जिसमें जांच, ईंधन भरने और रॉकेट में लगाने जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं। इसे 30 अगस्त या उसके बाद फाल्कन हेवी रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा। लॉन्च के बाद यह पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर लैग्रेंज पॉइंट-2 के पास काम करेगा। इसे कम से कम पांच साल तक संचालित करने की योजना है। हालांकि, पर्याप्त ईंधन होने पर यह 10 साल या उससे अधिक समय तक काम कर सकता है।

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